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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक
    मध्यप्रदेश

    इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक

    AdminBy AdminJuly 18, 2025No Comments8 Mins Read
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    इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक
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    • इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता में अपनी श्रेष्ठता की साबित ,सुपर स्वच्छ लीग में नंबर वन का स्थान 
    • इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक 
    • इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका 

    इंदौर

     इंदौर ने एक बार फिर बता दिया कि स्वच्छता में उसका कोई सानी नहीं है। गुरुवार सुबह जब दिल्ली के विज्ञान भवन में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, निगमायुक्त शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों से सम्मान स्वीकार कर रहे थे, हर इंदौरी खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा था। जिन अष्टसिद्धियों को पाने का संकल्प हमने 11 मार्च 2024 को स्वच्छता का सातवां आसमान छूते वक्त लिया था, उन्हें आखिर पा ही लिया।

    अब तक स्वच्छ सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में शामिल रहे इंदौर को इस बार सुपर स्वच्छ लीग में रखा गया था, लेकिन पिछले सात वर्ष की तरह इंदौर ने यहां भी खुद को पहले स्थान पर कायम रखा। इस बार प्रतियोगिता में 4,989 शहर थे। इन सबमें इंदौर को सबसे ज्यादा अंक मिले।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई मौकों पर कह चुके हैं कि इंदौरियों को नंबर वन पर रहने की आदत है, गुरुवार को यह बात एक बार फिर साबित हो गई। कहा जाता है कि नंबर वन पर पहुंचना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है इस पर लगातार बने रहना। इंदौर ने इस चुनौती को स्वीकारा और जीत हासिल की। कोई शहर यूं ही नहीं नंबर वन बन जाता। दरअसल स्वच्छता इंदौरियों के संस्कार में हैं, यहां के नागरिकों के रग-रग में रची-बसी है। आने वाले समय में चुनौतियां और कठिन होंगी।

    अष्टसिद्धि पाने के साथ ही इंदौर अब नई भूमिका में आ चुका है। अब खुद को स्वच्छ बनाए रखने के साथ-साथ इंदौर की जिम्मेदारी एक अन्य शहर को भी स्वच्छ बनाने की है। निश्चित ही इंदौर इस कठिन परीक्षा में भी सफल होगा। आखिर हमारी आदत है नंबर वन आने की।

    सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने के मायने

    स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हुए इस बार सुपर स्वच्छ लीग में पांच अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई थीं। दस लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर के साथ 11 अन्य शहर प्रतिस्पर्धा में शामिल थे। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में सूरत ने इंदौर को कड़ी चुनौती दी थी। इंदौर को पहला स्थान उसके साथ साझा तक करना पड़ा था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

    पिछली बार से सबक लेते हुए इंदौर ने इस बार ऐसी तैयारी की कि सूरत उसके आसपास भी नहीं पहुंच सका। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने से इंदौर की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह अब बड़े भाई की भूमिका में आ गया है। परिवार के सदस्यों का ध्यान रखना उसकी जिम्मेदारी हो गई है।

    इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक 

    आठ साल पहले इंदौर ने स्वच्छता का संकल्प ले सड़क किनारे के कचरे के ढेर व कचरा पेटियों को हटाया और हर घर से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने (सोर्स सेग्रिगेशन) का नवाचार किया। नगर निगम द्वारा किए गए इस बदलाव का साथ शहरवासियों ने दिया। उन्होंने अपने घर में गीले व सूखे कचरे का डिब्बा अलग रखा। कचरा पृथक्करण की इस मूल आदत के कारण इंदौर सात साल से स्वच्छता में नंबर-1 रहा। वहीं आठवीं बार सुपर लीग में शामिल होने के बाद भी देश के सभी शहरों में इंदौर सबसे आगे रहा।

    घर-बाजार से गीला-सूखा नहीं, छह तरह का कचरा अलग देने की शहरवासियों की आदत ही इंदौर को दूसरे शहरों से आगे बनाए हुए है। अलसुबह 6.30 बजे से शहर की कालोनियों में पहुंचने वाली डोर टू डोर कचरा संग्रहण की गाड़ियां देर रात छप्पन दुकान व सराफा बाजार के बंद होने के पहले उनका कचरा एकत्र कर ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाती हैं।

    इस कार्य में हर दिन दो हजार से ज्यादा कर्मचारी इन वाहनों के साथ मौसम की परवाह किए बगैर नियमित जिम्मेदारी निभाते हैं। साल के 365 दिन शहरवासियों व निगम के कर्मचारियों की शहर को नंबर एक बनाने के प्रण की यह जीवटता ही जो इंदौर को हर मुकाबले में सिरमौर बनाती है।
    गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेने से आगे रहा इंदौर

    सुपर स्वच्छ लीग में शामिल इंदौर के शामिल होने के कारण इस बार इंदौर किसी भी शहर से नंबर-1 के खिताब के लिए मुकाबला नहीं था। इस सर्वेक्षण में देश के अन्य शहरों के साथ इंदौर का स्कोर कार्ड भी जारी किया गया। लीग में शामिल सूरत व इस बार का नंबर-1 स्वच्छ शहर अहमदाबाद भी स्वच्छता के अन्य मापदंडों पर इंदौर की तरह शत प्रतिशत अंक लाए हैं।

    सोर्स सेग्रिगेशन यानि घर-बाजारों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग मिलने वाली श्रेणी में इंदौर को 98 प्रतिशत अंक मिले। वहीं सूरत को 92 व अहमदाबाद को 94 प्रतिशत अंक मिले। यानी इंदौर के मुकाबले सूरत, अहमदाबाद व अन्य शहरों को गीला-सूखा कचरा पूर्ण रूप से अलग-अलग नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से सोर्स सेग्रिगेशन ने इंदौर को स्कोर कार्ड में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया। 

    इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका 

    स्वच्छता के जिन सितारों को अपने दामन में संजोने का स्वप्न देखते-देखते देश के बड़े शहरों की आंखे पथरा गईं उन सितारों को इंदौर ने अपने आसमान पर संजो लिया है। गुरूवार को दिल्ली में जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इंदौर को सुपर लीग श्रेणी में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया तो मालवा के सिरमौर शहर इंदौर के लोगों ने कुछ यही पंक्तियां याद करते हुए बड़े गर्व से अपनी सफलता को सराहा।

    स्वच्छता की दौड़ में अपने मानक ऊंचे कर इंदौर इतना आगे निकल आया है कि प्रतिस्पर्धा करने वाले शहर सशंकित ही रहते हैं कि स्पर्धा में नंबर वन तो इंदौर को ही आना है, उन्हें दूसरा-तीसरा स्थान भी मिल जाए तो बात बन जाए। सफलता की सही कसौटी उसकी निरंतरता ही होती है। स्वच्छता की अष्टसिद्धि प्राप्त करके इंदौर ने दुनिया को बता दिया कि यूं ही कोई शहर इंदौर नहीं हो जाता।

    इसके लिए दृढ़ संकल्पित होकर लगातार परिश्रम करना होता है। दुनिया के लिए यह सफलता भले ही विलक्षण हो लेकिन इंदौर के लिए ये एक पड़ाव भर है। इंदौर को अभी लंबी यात्रा तय करनी है। देश के बड़े शहरों से आगे निकलने के बाद इंदौर की नजर दुनिया पर है। स्वच्छता का धवल ध्वज विश्व पटल पर लहराने के संकल्प के साथ इंदौर फिर तैयार है नई ऊंचाइयों को छूने के लिए।

        रिड्यूस (कम करना) : कचरे की मात्रा को कम करने के लिए हमने वेस्ट से बेस्ट की थीम पर काम किया। ग्रीन वेस्ट कम करने के लिए पैलेट बनाने की यूनिट लगाई। बेकार कपड़े से धागा बनाने की यूनिट लगने की दिशा में कदम बढ़ाया।
        रियूज (पुनरुपयोग करना) : हमने बेकार चीजों के पुनरुपयोग पर काम किया। बेकार, भंगार वस्तुओं से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करवाईं और उन्हें चौराहों पर सजाया।

        रिसाइकिल (पुनर्चक्रीकरण) : हमने रिसाइकिल को लेकर भी काम किया। सीवेज के बेकार पानी को उपचारित कर हम बगीचों को सींच रहे हैं। निर्माण कार्य में ले रहे हैं।

        रिफ्यूज (मना करना) : ऐसे उत्पाद जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें रिफ्यूज करते हुए हमने सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया। नगरीय सीमा में सिंगल यूज तैयार करने वाले कारखानों को सख्ती से बंद किया।

        रिथिंक (संसाधनों के दोहन को कम करना) : इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए हमने इस वर्ष क्लाइमेट मिशन शुरू किया। इसके तहत नागरिकों को बगैर संसाधनों के जीवन यापन के लिए प्रेरित किया। सिर्फ दो माह में करीब पौने दो करोड़ यूनिट बिजली की बचत की।

        रिपेयर (वस्तुओं को सुधारना) : थ्रीआर सेंटरों को अत्याधुनिक बनाया ताकि वहां आने वाली पुरानी वस्तुओं को रिपेयर कर दोबारा उपयोग योग्य बनाया जा सके।

        रिपर्पस (फेंकने के बजाय वस्तुएं दूसरों को देना) : शहर के प्रत्येक जोन में थ्री आर सेंटर खोला, नागरिकों को उनकी अनुपयोगी वस्तुएं सेंटर पर देने के लिए प्रेरित किया। आज हमारे पास प्रदेश का सबसे बड़ा थ्री आर सेंटर सेटअप है।

        रिनोवेशन (नवाचार) : हमने लगातार नवाचार किए। ग्रीन वेस्ट से पैलेट, बेकार कपड़े से धागा, पुराने आइल से तेल बनाने जैसे कई नवाचार किए।

    स्वच्छता में देश का अग्रदूत बना मध्य प्रदेश

        राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा इंदौर को ‘सुपर स्वच्छ लीग सिटीज’ श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित किया जाना प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। इंदौर के साथ सात अन्य शहरों को भी विभिन्न श्रेणियों में स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि पूरा मध्य प्रदेश अब स्वच्छता में देश का अग्रदूत बन चुका है। – डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

     

     

     

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