Close Menu
New Agenda
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    NEW AGENDA
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • लाइफ स्टाइल
    NEW AGENDA
    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»जंगली हाथियों की ट्रैकिंग होगी आसान, कान्हा में लगाए जाएंगे विदेशी कॉलर आईडी
    मध्यप्रदेश

    जंगली हाथियों की ट्रैकिंग होगी आसान, कान्हा में लगाए जाएंगे विदेशी कॉलर आईडी

    AdminBy AdminAugust 28, 2025No Comments8 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    जंगली हाथियों की ट्रैकिंग होगी आसान, कान्हा में लगाए जाएंगे विदेशी कॉलर आईडी
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    मंडला

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court)को एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन ने अवगत कराया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में रखे गए जंगली हाथी को 15 दिन में छोड़ दिया जाएगा। विदेश से मंगाई गई कॉलर आइडी पहनाई जाएगी। ताकि उसकी ट्रैकिंग की जा सके। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने उक्त जानकारी को रिकार्ड पर ले लिया। साथ ही शहडोल से पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाए गए हाथी की मौत को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को फटकार लगाई। याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने दायर की थी।

    कोर्ट ने मांगा 30 साल का पूरा विवरण

    एमपी कोर्ट ने निर्देश दिया कि जंगली हाथियों को पकड़ने की प्रक्रिया में वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को नियत की गई। जंगली हाथियों को पकड़ने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए। सरकार की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है। जिसमें से दो हाथियों को विदेश से मंगवाई गई कालर आइडी पहनाकर छोड़ दिया।

    अब हाथियों की होगी एक पहचान
    अब तक आपने बाघों के अलग-अलग नाम सुने होंगे, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी बाघों के अलग-अलग नाम रखे गए हैं. उनकी एक अलग आइडेंटिफिकेशन है. उनकी पूरी हिस्ट्री प्रबंधन के पास होती है, और जरूरत पड़ने पर एक ही झटके में ये किस तरह का टाइगर है, इसका व्यवहार कैसा रहता है, कहां-कहां मोमेंट रहता है, सब कुछ जानकारी मिल जाती है. ठीक उसी तरह से अब हाथियों की भी एक अलग पहचान बनाई जा रही है. मध्य प्रदेश में बांधवगढ टाइगर रिजर्व में ही ऐसा पहली बार हो रहा है जहां हाथियों को आईडेंटिफाई किया जा रहा है. उनको एक अलग नाम दिया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है.

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''हाथियों को नाम देने का काम, उनकी आइडेंटिटी बनाने का काम 25 मई से शुरु कर दिया है और जब तक पूरा नहीं हो जाएगा तब तक यह काम किया जाएगा. ये इसलिए किया जा रहा है कि अब लंबे वक्त से हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में परमानेंट तौर पर निवास कर रहे हैं और वे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ही हो चुके हैं. इसलिए उनका आइडेंटिफिकेशन भी जरूरी है. उनका इतिहास, उनका डाटा तैयार करना ताकि एक क्लिक पर उनके बारे में सब कुछ जाना जा सके. इसी के लिए उनकी एक आईडी जेनरेट की जा रही है, जिससे उनकी एक इंडिविजुअल पहचान हो सकेगी. हम उन्हें एक अलग नाम दे देंगे, एक अलग आईडी दे देंगे. जैसे टाइगर का t1 T2 होता है ठीक इसी तरह से हाथियों का भी एक कोड वर्ड होगा और उनका एक अलग नाम होगा, और उसी नाम से वो जाना जाएगा.''

    कैसे होगी पहचान ?
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक बताते हैं कि, ''हाथियों की पहचान करने के लिए उनके जो शरीर में मार्क्स होते हैं, उस आधार पर उनको पहचान दी जाएगी. जैसे किसी हाथी का कान फोल्ड होता है, किसी का कान कटा होता है, कोई तस्कर होता है, किसी का दांत उठा हुआ होता है, किसी का टेढ़ा-मेढ़ा होता है, किसी का टूटा हुआ होता है. इसके अलावा पीठ की पॉजीशन किसी की फ्लैट होती है, किसी का उठा हुआ होता है. किसी के पूंछ में बाल नहीं होते हैं. किसी के पूंछ कटे होते हैं, हर हाथी के कुछ ना कुछ मार्क्स होते हैं. उनकी यूनिक पहचान होती है. इस आधार पर उनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है.

    क्या होगा फायदा?
    हाथियों का आईडेंटिफिकेशन कर देने से, उनको एक अलग नाम दे देने से आखिर क्या फायदा होगा. इसे लेकर उपसंचालक बताते हैं कि, ''उनकी एक अलग पहचान हो जाने से हम उन्हें ट्रैक कर पाएंगे. उनके हर मूवमेंट पर नजर रख पाएंगे. साथ ही हमारे पास हर हाथी का डाटा होगा, उसके बारे में पूरी जानकारी होगी. साल भर किस तरह का व्यवहार करता है, कौन सा हाथी कनफ्लिक्ट में शामिल रहता है, कौन शांत रहता है, कौन किस दिशा में किस सीजन में कहां मूवमेंट करता है. कौन सा हाथी हर्ड (झुंड) के साथ ही रहता है, कौन सा हर्ड के बाहर जाता है. किस तरह का व्यवहार होता है ये सब कुछ पता रहेगा तो हाथियों की देखरेख में भी मदद मिलेगी.''

    जब बांधवगढ़ के हुए हाथी
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी पिछले कई सालों से छत्तीसगढ़ से होकर संजय गांधी टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर वाले रास्ते से बांधवगढ़ आते जाते रहे हैं. पहले स्थाई तौर पर नहीं रहते थे, आते थे चले जाते थे. लेकिन साल 2018 में जब बांधवगढ टाइगर रिजर्व में 40 हाथियों का एक दल पहुंचा, उसके बाद से यहीं रह गए और फिर वापस नहीं गये. इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता गया और अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ही इन्होंने अपना नया ठिकाना बना लिया है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पहचान बाघों के साथ-साथ हाथियों के लिए भी होने लगी है.

    बांधवगढ़ में अभी कितने हाथी ?
    बांधवगढ टाइगर रिजर्व में अभी कितने हाथी हैं इसे लेकर टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''40 से 50 के लगभग हाथी हैं. कुछ महीने पहले 10 साथियों की डेथ हो गई थी और 5 से 10 हाथी ऐसे हैं जिनका मूवमेंट इधर-उधर होता रहता है. कभी आते हैं, कभी चले जाते हैं. लगभग 50 हाथी परमानेंट तौर पर रह रहे हैं. अभी जब इनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है तो यह और अच्छी बात होगी कि इनका एक्चुअल डाटा भी निकल कर सामने आ जाएगा.''

    हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया?
    आखिर हाथियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ही क्यों पसंद आया? इसे लेकर कुछ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, ''हाथियों की मेमोरी पावर बहुत ज्यादा होती है और उन्हें पीढ़ियों की चीजें याद रहती हैं, वो अपने रास्ते कभी नहीं भूलते हैं. जब कभी भी उन्हें कहीं पर थोड़ा अनसिक्योर लगता है, जंगल में मानव दखल बढ़ने लगता है, या उनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है, तो उस स्थान को छोड़कर वो दूसरी सुरक्षित जगह की तलाश में निकल जाते हैं. बांधवगढ टाइगर रिजर्व भी उनके लिए बेस्ट सुरक्षित जगह में से एक है.''

    ''उसकी वजह ये है कि बांधवगढ टाइगर रिजर्व में घना और बड़ा जंगल है. कई छोटी-छोटी नदियां हैं. साल भर पीने के लिए पर्याप्त पानी रहता है. उनका पसंदीदा भोजन बांस के जंगल की भरमार है, और सबसे बड़ी बात वो यहां खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. अभी उतना मानव दखल नहीं है, जिसके चलते हाथियों ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को अपना नया ठिकाना बना लिया. जाहिर सी बात है, जब किसी भी जीव को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, खाने के लिए पर्याप्त भोजन मिलेगा, रहने के लिए बेहतर संसाधन मिलेंगे, पीने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा तो फिर वो उस जगह को कभी नहीं छोड़ेगा. बांधवगढ टाइगर रिजर्व में भी हाथियों के लिए कुछ ऐसा ही है.''

    बाघ-हाथी एक ही जंगल में साथ-साथ
    भारत में हाथी केरल, कर्नाटक, असम जैसी जगहों पर बहुतायात में पाए जाते हैं. बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान और राजाजी नेशनल पार्क हाथियों के लिए ही फेमस है. लेकिन अब जिस तरह से बांधवगढ टाइगर रिजर्व में हाथियों की एंट्री हुई है, और लगातार इनकी संख्या बढ़ती जा रही है, वो मध्य प्रदेश के इस टाइगर रिजर्व को अलग बना रही है. क्योंकि अब ये प्रदेश का ऐसा टाइगर रिजर्व बनता जा रहा है, जहां बाघ और हाथी साथ-साथ देखे जा सकते हैं. अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को बाघ के साथ हाथियों के भी दीदार होंगे. इतना ही नहीं कई बार तो ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें एक ओर बाघ मस्त अंदाज में बैठा हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर हाथी मदमस्त चाल में जा रहे हैं. बीच में पर्यटक खड़े होकर उनकी तस्वीर निकाल रहे हैं. ऐसी तस्वीर देश में बहुत कम ही देखने को मिलती हैं, जो इस बार बांधवगढ टाइगर रिजर्व में देखने को मिला.

    बांधवगढ़ कितना बड़ा है
    मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में मौजूद है बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो 1536 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ एरिया है. जिसमें 716 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 820 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है. यहां पर कई जीव जंतु पशु पक्षी पाए जाते हैं, जो आकर्षण का केंद्र है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ है. लेकिन अब यह हाथियों के गढ़ से भी पहचाना जाने लगा है. यहां बारहसिंघा भी बसाए जा रहे हैं. बायसन भी लाये जा रहे हैं. चीता, तेंदुआ भालू इनके लिए भी खास पहचान रखता है बांधवगढ़. साथ ही यहां कई ऐसे जीव जंतु, पशु पक्षी, पेड़ पौधे पाए जाते हैं जो बहुत ही यूनिक है. अलग अलग प्रजातियों के गिद्धों के लिए भी बांधवगढ़ अब अपनी पहचान बना रहा है.

    शेयर करें :-

    • Click to share on Facebook (Opens in new window)
    • Click to share on WhatsApp (Opens in new window)
    • Click to share on X (Opens in new window)
    • Click to share on Telegram (Opens in new window)
    Elephants Featured
    Admin

    Related Posts

    इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाने वाले प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

    February 15, 2026

    पावरफुल शख्सियतें और नाबालिग लड़कियां: एपस्टीन के घातक काले कारनामों का पर्दाफाश

    February 15, 2026

    शिवपुरी में वकील संजय सक्सेना की हत्या के तीन आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार

    February 15, 2026

    बेटे के इलाज के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने की 1.59 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी

    February 15, 2026

    ग्वालियर में बहू की प्रताड़ना से तंग आकर बुजुर्ग ने की थी आत्महत्या

    February 15, 2026

    इंदौर में नई ‘नेटम’ तकनीक से बनेगा छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन

    February 15, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    MP Info RSS Feed
    अन्य ख़बरें

    बेंगलुरु में बस से तेज रफ्तार कार टकराने से 5 लोगों की मौत

    February 15, 2026

    इंदौर में आईईटी में रैगिंग के लिए उकसाने वाले प्रथम वर्ष के चार विद्यार्थी होंगे निष्कासित

    February 15, 2026

    पावरफुल शख्सियतें और नाबालिग लड़कियां: एपस्टीन के घातक काले कारनामों का पर्दाफाश

    February 15, 2026

    शिवपुरी में वकील संजय सक्सेना की हत्या के तीन आरोपी शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार

    February 15, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक -दीपेन्द्र पाढ़ी
    मोबाइल -9329352235
    ईमेल -newagendaeditor@gmail.com
    मध्य प्रदेश कार्यालय -वार्ड क्रमांक 06, मोहगांव बिरसा, मोहगांव जिला-बालाघाट (म.प्र.)
    छत्तीसगढ़ कार्यालय-D 13, प्रियदर्शनी नगर के पास, पचपेड़ी नाका, रायपुर (छत्तीसगढ़)
    February 2026
    M T W T F S S
     1
    2345678
    9101112131415
    16171819202122
    232425262728  
    « Jan    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.