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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»VR टेक्नोलॉजी से होगी सिंहस्थ की निगरानी, पुलिस 54 हजार कर्मियों को देगी वर्चुअल ट्रेनिंग
    मध्यप्रदेश

    VR टेक्नोलॉजी से होगी सिंहस्थ की निगरानी, पुलिस 54 हजार कर्मियों को देगी वर्चुअल ट्रेनिंग

    AdminBy AdminOctober 9, 2025No Comments6 Mins Read
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    VR टेक्नोलॉजी से होगी सिंहस्थ की निगरानी, पुलिस 54 हजार कर्मियों को देगी वर्चुअल ट्रेनिंग
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    उज्जैन 

    उज्जैन पुलिस ने देशभर के 54 हजार जवानों को वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। यह पहल 2028 के महाकुंभ के दौरान लागू की जाएगी, जो कि देश में अपनी तरह की पहली योजना होगी। उज्जैन पुलिस इस तकनीक का उपयोग करते हुए कुंभ ड्यूटी पर तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करेगी।

    वर्चुअल रियलिटी से कुंभ ड्यूटी का प्रशिक्षण

    उज्जैन में महाकुंभ की तैयारियां जोरों पर हैं। पुलिसकर्मी वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से उज्जैन की गलियों, सड़कों, चौराहों और श्रद्धालुओं के मार्ग को समझेंगे। उन्हें यह प्रशिक्षण अपने शहर में बैठे-बैठे ही मिलेगा। इस तकनीक के जरिए पुलिसकर्मी जान सकेंगे कि उन्हें कहां तैनात किया जाएगा और किस मार्ग का उपयोग करना होगा।

    जो अपने शहर राज्य में बैठकर उज्जैन की गलियों, सड़क, मार्ग, चौराहे, एंट्री एग्जिट और श्रद्धालुओं को किस मार्ग पर भेजना और रोकने की ट्रेनिंग भी VR के माध्यम से लेंगे।

    उज्जैन पुलिस ने फिलहाल 200 VR सेट मंगवाए हैं। VR से ट्रेनिंग पुलिस आर्म्स फोर्स होमगार्ड वॉलिंटियर्स को दी जाएगी।

    उज्जैन में होने वाले महाकुंभ के आयोजन में पुलिस हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी। ऐसा प्रयागराज कुंभ में भी देखने को नहीं मिला था। पहली बार VR टेक्नोलॉजी का उपयोग कर अपने अपने शहर में उज्जैन की सड़कों-गलियों आने-जाने के मार्ग की ट्रेनिंग VR से मिलेगी।

    पहले उज्जैन में, फिर अपने शहर में लेंगे ट्रेनिंग एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का उपयोग करेंगे। दूसरे प्रदेश और जिले से आने वाले पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए VR ट्रेनिंग का माध्यम चुना है। सड़कों के 3D वीडियो बनवाए हैं। ये पुलिसकर्मियों को VR के माध्यम से उनके शहर में ही दिखाए जाएंगे।

    सोमवार को VR सेट का परीक्षण किया है। सबसे पहले पुलिसकर्मी उज्जैन आकर देखेंगे कि उनकी ड्यूटी कहां लगेगी। कौन सा रास्ता कहां से किधर जाएगा। इसके बाद उन्हें बार-बार ट्रेनिंग के लिए उज्जैन नहीं आना पड़ेगा।

    पुलिसकर्मी अपने प्रदेश में कहीं भी होगा, वह VR के माध्यम से शहर की भौगोलिक स्थिति और रियल टाइम स्थिति जानकर ट्रेनिंग पूरा कर लेगा।

    ट्रेनिंग प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग

    एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में अधिक से अधिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले पुलिसकर्मियों के लिए VR तकनीक का चयन किया गया है। इसके तहत सड़कों के 3D वीडियो तैयार किए गए हैं, जिनका उपयोग पुलिसकर्मियों को उनकी शहर की भौगोलिक स्थिति समझाने के लिए किया जाएगा।

    सोमवार को VR सेट का परीक्षण किया गया, जिसके बाद पुलिसकर्मी उज्जैन आकर देखेंगे कि उनकी ड्यूटी कहां लगेगी। इससे उन्हें बार-बार उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, और वे अपने प्रदेश में कहीं से भी इस प्रशिक्षण को पूरा कर सकेंगे।
    आपातकालीन स्थितियों में VR का महत्व

    शुरुआत में इंदौर रोड से शिप्रा नदी के घाट तक का वीडियो तैयार किया गया है। इस वीडियो की मदद से पुलिसकर्मी आपातकालीन स्थितियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। एसपी ने बताया कि 200 VR सेट का ऑर्डर दिया गया है और भविष्य में उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

    इस तकनीक का उद्देश्य यह है कि पुलिसकर्मी जब VR का उपयोग करेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे वास्तव में उस स्थान पर खड़े हैं, जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इससे उनकी प्रशिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
    सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग

    2028 के सिंहस्थ महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीकें भीड़ प्रबंधन में सहायक होंगी।

    उज्जैन के चार रेलवे स्टेशनों को भी हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें नई खेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामन और विक्रम नगर स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, हाई क्वालिटी CCTV कैमरे और ड्रोन निगरानी के माध्यम से संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाएगी।
    स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण

    उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की लागत से स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। यह सिटी 2378 हेक्टेयर भूमि पर बनाई जाएगी, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़कें, अंडरग्राउंड लाइट, अस्पताल, स्कूल और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी।

    इस परियोजना के माध्यम से उज्जैन को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने का लक्ष्य है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करेगा।

    इस नई पहल से यह स्पष्ट होता है कि उज्जैन पुलिस और स्थानीय प्रशासन महाकुंभ को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    आपातकालीन समय में भी काम आएगा VR

    अभी शुरुआत में इंदौर रोड का शिप्रा नदी के घाट तक का वीडियो बनवाया है। इससे ट्रेनिंग की शुरुआत होगी। VR आपातकालीन समय में कैसे काम आ सकता है, इस पर भी काम कर रहे हैं। जल्द ही उस दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। 200 वीआर सेट के ऑर्डर दिए हैं। बाद में धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती जाएगी।

    उज्जैन कुंभ में खड़े होने का होगा अहसास वीडियो में बैकग्राउंड में हिंदी और इंग्लिश में नरेशन भी है। इसमें पूरे शहर की हर छोटी-बड़ी डिटेल दी जाएगी। जो बाद में भी काम आएगी।

    एसपी प्रदीप शर्मा का कहना है कि ट्रेनिंग में मैप पर समझा भी देंगे तो याद नहीं रहेगा। लेकिन, जब वह पुलिसकर्मी VR से देखेंगे तो उन्हें ऐसा प्रतीत होगा जैसे उसी जगह खड़े हैं। जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इससे फील्ड याद रहेगा। कुछ प्लान चेंज भी हुए तो भी दिक्कत नहीं होगी। देश में पहली बार पुलिस उज्जैन में उपयोग करेगी।

    AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम भी

    सन 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके "हाईटेक" कुम्भ आयोजित होगा। जिसमें AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीक भीड़ प्रबंधन में उपयोग में ली जायेगी।

    रेलवे स्टेशन भी हाईटेक होंगे

    उज्जैन के चार रेलवे स्टेशन नई खेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामन और विक्रम नगर स्टेशन को हाईटेक बनाया जाएगा। इन स्टेशनों पर अगर कोई अपराधी ट्रेन से उज्जैन आता है तो फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, हाई क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, कंट्रोल रूम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक से उन पर नजर रखी जा सकेगी, साथ ही इससे भीड़ को कंट्रोल करना और संदिग्ध लोगों पर नजर रखना आसान होगा।

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