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    Home»देश»अहमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार, पिता को दिया सांत्वना संदेश
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    अहमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार, पिता को दिया सांत्वना संदेश

    AdminBy AdminNovember 7, 2025No Comments5 Mins Read
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    अहमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार, पिता को दिया सांत्वना संदेश
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     नई दिल्ली/ अहमदाबाद
       

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद प्लेन क्रैश जुड़े मामले पर सुनवाई की. इस अदालत ने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के पायलट-इन-कमांड, दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता से कहा, "देश में कोई भी यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी."

    जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी 91 साल के पुष्कर सभरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. पुष्कर सभरवाल ने इस क्रैश की एक स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सही जांच की मांग की है, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें.

    हमदर्दी जताते हुए, बेंच ने याचिकाकर्ता पुष्कर सभरवाल को भरोसा दिलाया कि इस हादसे के लिए उनके बेटे को दोषी नहीं ठहराया जा रहा है.

    इस साल जून में अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के लंदन जाने वाले विमान के पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने कहा, "इस त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." बता दें कि इस विमान हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी.

    न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ उस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान के पायलटों में से एक, कमांडर सुमित सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति से दुर्घटना की जांच कराने का अनुरोध किया गया था.

    याचिका में तर्क दिया गया है कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में भारी खामियां हैं. सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि जांच दल ने व्यापक तकनीकी जांच करने के बजाय, मुख्य रूप से मृत पायलटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब अपना बचाव करने में असमर्थ हैं.

    याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों द्वारा की गई जांच में तथ्यों का चयनात्मक और अपूर्ण खुलासा, महत्वपूर्ण विसंगतियों की उपेक्षा, तथा उन प्रणालीगत कारणों को दबाना शामिल है जो डिजाइन या इलेक्ट्रॉनिक खराबी की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में बिना किसी पुष्टिकारक साक्ष्य या व्यापक तकनीकी विश्लेषण के जल्दबाजी में यह अनुमान लगाया गया है कि यह घटना पायलट की गलती से हुई है.

    याचिका में भारत संघ, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और महानिदेशक, विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और चूक हैं, जिससे इसके निष्कर्ष अविश्वसनीय हैं.

    आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निष्पक्ष जांच चाहते हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एएआईबी द्वारा की जा रही वर्तमान जांच स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि वह विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम के नियम 12 के तहत न्यायिक निगरानी में जांच का निर्देश दे.

    न्यायमूर्ति ने कहा- "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह दुर्घटना घटी और उन्होंने अपने बेटे को खो दिया. लेकिन उन्हें यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे पर आरोप लगाया जा रहा है या उसे दोषी ठहराया जा रहा है. हम स्पष्ट कर देंगे, कोई भी उसे किसी भी चीज के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता."

    न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पायलट के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और रिपोर्ट में दोष बांटने का कोई सवाल ही नहीं है और वास्तव में, जांच का उद्देश्य दोष बांटना नहीं है और इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचना नहीं है. शंकरनारायण ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख का उल्लेख किया, जो इस जांच से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और जिसमें कहा गया है कि उनके मुवक्किल के बेटे पर हमला किया जा रहा है.

    न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हमें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि एक विदेशी प्रेस, आपके मुकदमे को अमेरिकी अदालत में डब्ल्यूएसजे के खिलाफ क्या कहना चाहिए था." वरिष्ठ वकील ने कहा कि डब्ल्यूएसजे एक भारतीय सरकारी सूत्र का हवाला दे रहा है. पीठ ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और आरोप एक विदेशी प्रेस द्वारा लगाया गया है, जिसका आक्षेप तथ्यात्मक रूप से गलत है.

    न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि इस तरह की घटिया रिपोर्टिंग इसलिए की जा रही है क्योंकि वे केवल भारत को दोष देना चाहते हैं. शंकरनारायणन ने कहा कि हमें इस घटिया रिपोर्टिंग को नज़रअंदाज करना चाहिए. पीठ ने जवाब दिया कि उनके समक्ष प्रस्तुत याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है.

    वरिष्ठ वकील ने बताया कि 3 अगस्त को, प्रतिवादी संख्या 3, जो प्रारंभिक जांच कर रहे हैं ने अपने मुवक्किल, जो अब 91 वर्ष के हैं, के घर दो अधिकारियों को भेजा. उन्होंने सवाल किया कि आपके बेटे का तलाक कब हुआ. उसे बताया गया कि करीब 15 साल पहले. इस पर यह थ्योरी बनायी जाने लगी कि वह अवसाद से ग्रस्त था इसीलिए आत्महत्या करने की कोशिश की. उनके मुवक्किल से भी उनकी पत्नी का निधन के बारे में पूछा गया.

    वरिष्ठ वकील ने कहा कि अधिकारियों ने उनके मुवक्किल से कहा कि इसलिए उनके बेटे को अवसाद है, जबकि उन्होंने जांचकर्ताओं के आचरण की आलोचना की. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि भारत कोई छोटा देश नहीं है, बल्कि 142 करोड़ लोगों वाला देश है. उन्होंने आगे कहा, "किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि पायलट की कोई गलती थी. त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है."

    वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का बेटा पायलट था और उनका पोता भी पायलट है और वे राष्ट्र को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लोगों द्वारा इस तरह के आरोप लगाना गलत है. प्रतिवेदन सुनने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा और 10 नवंबर को एक अन्य संबंधित मामले के साथ इस मामले पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई.

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