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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»सरकार लाएगी विधेयक: MP के विधायकों का वेतन बढ़कर 1.70 लाख रुपये होगा
    मध्यप्रदेश

    सरकार लाएगी विधेयक: MP के विधायकों का वेतन बढ़कर 1.70 लाख रुपये होगा

    AdminBy AdminNovember 28, 2025No Comments6 Mins Read
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    सरकार लाएगी विधेयक: MP के विधायकों का वेतन बढ़कर 1.70 लाख रुपये होगा
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     भोपाल 

    मध्यप्रदेश विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ेंगे। वर्तमान में विधायकों को 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं। अब 50 हजार बढ़ाकर देने की तैयारी है। यानी अब 1 लाख 60 हजार रुपए मिलेंगे। सीएम मोहन यादव ने सहमति दे दी है। संभावना है की 2 दिसंबर की कैबिनेट में मंजूरी के बाद 4 दिसंबर को विधानसभा में विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने की मंजूरी दे दी जाए। 

    संसदीय कार्य विभाग ने गुरुवार को इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे सैद्धांतिक सहमति के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी से संबंधित विधेयक 1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाया जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 9 साल बाद विधायक और मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी। पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही माननीयों के वेतन में बढ़ोतरी कर चुके हैं।

    विधायकों का बढ़ेगा वेतनभत्ता

    विधायकों की वर्तमान सैलरी में मूल सैलरी 30 हजार है। निर्वाचन भत्ता 35 हजार, चिकित्सा भत्ता 10 हजार है। अर्दली भत्ता 10 हजार, टेलीफोन खर्च 10 हजार है। किताब, पत्रिका और अन्य सामग्री के लिए 15 हजार मिलते हैं। यानी कुल मिलाकर विधायकों को 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं। 50 हजार रुपए बढ़ाने के बाद 1 लाख 60 हजार हो जाएंगे। पूर्व विधायकों और जिन विधायकों का निधन हो गया है उनकी पत्नी को मिलने वाली कुटुंब पेंशन भी 35 हजार से बढ़ाकर 60 हजार की जा रही है।

    विधानसभा में अध्यक्ष ने की थी घोषणा दरअसल, इसी साल बजट सत्र के दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व अन्य विधायकों ने सदन में वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आसंदी से कहा कि यदि सरकार विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने पर विचार करने के लिए समिति का गठन करें तो विधानसभा अपनी सिफारिश भेज सकती है।

    इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सहमति जताई। इसके बाद 27 अक्टूबर को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस कमेटी में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अलावा बीजेपी विधायक अजय विश्नोई और खरगोन जिले के कसरावद से विधायक सचिन यादव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। संसदीय कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव बनाया गया।

    कमेटी ने अपना प्रस्ताव भेजा कमेटी ने दो दौर की चर्चा कर वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव तैयार कर अपनी सिफारिश राज्य शासन को भेजी। इसमें पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में वृद्धि का प्रस्ताव भी शामिल किया गया था, लेकिन सरकार की तरफ से कहा गया कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर भी विचार किया जाए, इसके बाद नए सिरे से कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया।

    सैलरी का फैसला शीतकालीन सत्र में

    विधायकों की सैलरी, पेंशन और सुविधाओं को बढ़ाने के लिए खास कमेटी बनाई गई थी। इसे एक टारगेट दिया गया है। इस कमेटी को कहा गया है कि वह 30 नवंबर तक अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंप दे।

    ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि 1 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में फैसले पर अंतिम मुहर लगाई जा सके।

    मुख्यमंत्री ने विधानसभा में भरोसा दिलाया था कि विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की जाएगी। अब कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही, विधानसभा के सत्र में इस वादे को पूरा करने का मौका मिलेगा। यानी, दिसंबर महीने में ही जनप्रतिनिधियों के लिए यह बड़ी खुशखबरी आ सकती है। 

    विधायकों का बीमा कराने पर फैसला नहीं हुआ समिति के सामने यह प्रस्ताव भी आया था कि विधायकों का 10 लाख रुपए तक का बीमा कराया जाए, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया। समिति के सामने विधायकों के परिवार के सदस्यों के इलाज के खर्च पर विचार विमर्श किया गया। इस पर भी सहमति नहीं बन पाई। सरकार ने बीमा कराने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी, क्योंकि विधायकों के इलाज का पूरा खर्च सरकार के खजाने से ही होता है।

    पूर्व विधायकों की पेंशन में हो सकता है 66 फीसदी का इजाफा मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों की पेंशन में 66 फीसदी का इजाफा हो सकता है। वर्तमान में पूर्व विधायकों को 20 हजार रुपए पेंशन और 15 हजार रुपए चिकित्सीय सहायता मिलाकर 35 हजार रुपए मिलते हैं। अब इसमें 23 हजार रुपए का इजाफा कर 58 हजार रुपए किया जा रहा है।

    विधानसभा अध्यक्ष की सैलरी में 27 फीसदी का इजाफा विधायक और पूर्व विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष की सैलरी में भी इजाफा करने पर सहमति बनी है। विधानसभा में चुनकर आए वरिष्ठ विधायक को ही सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाता है। उसे हर महीने 47 हजार रुपए वेतन, 48 हजार रुपए सत्कार भत्ता, 45 हजार रुपए निर्वाचन क्षेत्र भत्ता के साथ हर दिन 1500 रुपए दैनिक भत्ता भी दिया जाता है।

    इस तरह से विधानसभा अध्यक्ष को वेतन और भत्ते के रूप में कुल 1 लाख 85 हजार रुपए महीना मिलता है। अब इसमें 27 फीसदी का इजाफा करते हुए ये राशि 2 लाख 35 हजार रुपए करने का प्रस्ताव है। वहीं विधानसभा उपाध्यक्ष को फिलहाल 45 हजार रुपए महीना वेतन, 45 हजार रुपए महीने सत्कार भत्ता, 35 हजार महीने निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और 1500 रुपए हर दिन दैनिक भत्ता मिलता है।

    इस तरह से 1 लाख 70 हजार रुपए महीना मिलता है। अब इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी कर 2 लाख किए जाने का प्रस्ताव है।

    नेता प्रतिपक्ष का वेतन- भत्ता 2.20 लाख करने का प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष को हर महीने 45 हजार रुपए वेतन, 45 हजार रुपए सत्कार भत्ता, 35 हजार निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, डेढ़ हजार रुपए प्रतिदिन दैनिक भत्ता दिया जाता है। इस प्रकार हर महीने 1 लाख 70 हजार रुपए मिलते है। अब इसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए ये 2 लाख 20 हजार रुपए किए जाने का प्रस्ताव है।

    अब जानिए किसका कितना वेतन बढ़ेगा

    विधायकों के वेतन में 54 फीसदी की बढ़ोतरी संभावित आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विधायकों के वेतन में करीब 60 हजार रुपए की वृद्धि की जा सकती है। यह वर्तमान वेतन की करीब 54 प्रतिशत होगी। इस तरह विधायकों का वेतन बढ़कर 1 लाख 70 हजार रुपए हो जाएगा। इससे पहले वर्ष 2016 में प्रदेश के विधायकों के वेतन, भत्तों में वृद्धि की गई थी। MP में विधायकों का कुल वेतन एक लाख 10 हजार रुपए है। इसमें 30 हजार रुपए बेसिक सैलरी और 80 हजार रुपए मासिक भत्तों के रूप में मिलते हैं।

    विधायकों का सबसे ज्यादा 2.88 लाख वेतन झारखंड में झारखंड में विधायकों को पूरे देश में सबसे ज्यादा वेतन मिलता है। झारखंड के विधायकों का कुल वेतन 2.88 लाख रुपए है। इसके बाद विधायकों को सबसे ज्यादा वेतन देने वाला दूसरा राज्य महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र में विधायकों को हर माह 2.60 लाख रुपए वेतन मिलता है। इस सूची में तीसरे नंबर पर तेलंगाना आता है। तेलंगाना के विधायकों का वेतन 2.50 लाख रुपए है। नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में विधायकों का वेतन सबसे कम है।

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