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    Home»देश»लाखों की सैलरी पर EMI का बोझ, भारतीय परिवारों की जेब रह रही खाली
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    लाखों की सैलरी पर EMI का बोझ, भारतीय परिवारों की जेब रह रही खाली

    AdminBy AdminDecember 7, 2025No Comments5 Mins Read
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    लाखों की सैलरी पर EMI का बोझ, भारतीय परिवारों की जेब रह रही खाली
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    नई दिल्ली

    आज के समय में देश का युवा वर्ग तेज़ी से तरक्की कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक चिंता भी गहराती जा रही है-युवाओं की आय का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है। कार-बाइक के आसान कर्ज, ऑनलाइन शॉपिंग की इएमआई, क्रेडिट कार्ड, सामाजिक कार्यक्रमों पर खर्च और लाइफस्टाइल को लेकर बढ़ती अपेक्षाओं ने युवाओं को आर्थिक दबाव में धकेल रही हैं। युवाओं ने बताया कि उनकी आधी से अधिक सैलरी ईएमआई में चली जा रही है। जिस वजह से उनकी जेब खाली रह जा रही है। इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वित्तीय अनुशासन अपनाने की आदत डाल ली जाए, तो युवाओं की यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
     आज के समय हर चीज ईएमआई पर आसानी से मौजूद है।

    घर से लेकर, स्मार्टफोन, टीवी, बाइक, कार आदि सब ईएमआई पर आसानी से मिल जाते हैं। यही नहीं, जिनके पास क्रेडिट कार्ड है, वे विदेश यात्रा भी ईएमआई पर कर आते हैं। इनमें युवा प्रोफेशनल की संख्या काफी ज्यादा है। उन्हें लगता है कि ईएमआई पर यह सब खरीदना और कर्ज पर लग्जरी लाइफ जीना तरक्की और यह सफलता है। लेकिन कभी-कभी इस चमक के पीछे पैसों का एक बड़ा लीकेज छिपा होता है। Zactor के फाउंडर और सीए अभिषेक वालिया ने ऐसी आदतों को लेकर युवाओं को चेतावनी दी है।

    सीए अभिषेक वालिया ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने एक क्लाइंट के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि एक क्लाइंट ने उन्हें बड़े गर्व के साथ लग्जरी ट्रैवल और प्रीमियम गैजेट्स की कहानियां सुनाईं। लेकिन जब नंबर्स देखे गए, तो कहानी बिल्कुल अलग थी। उन्होंने कहा कि वह आदमी बहुत कॉन्फिडेंट और खुश था। वह बिजनेस क्लास में सफर करने की बात कर रहा था क्योंकि जिंदगी छोटी है और वह आराम का हकदार है। लेकिन जैसे ही उसके खर्चों का हिसाब-किताब सामने आया, तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

    ईएमआई पर ऐश-ओ-आराम
    वालिया ने पोस्ट में बताया कि वह शख्स ईएमआई के बोझ से दबा था। दुबई की बिजनेस-क्लास टिकट की कीमत ईएमआई पर 78,500 रुपये थी। उसका लेटेस्ट आईफोन 18 महीने की जीरो-कॉस्ट ईएमआई पर 1,28,000 रुपये का था। हर महीने 22,000 रुपये के प्रीमियम कपड़ों के लिए उसने 'पे-लेटर' प्लान लिया हुआ था। मालदीव की 1.6 लाख रुपये की ट्रिप के लिए भी 94,000 रुपये अभी बाकी थे।

    करीब आधी सैलरी जितनी ईएमआई
    उसकी सैलरी 1,15,000 रुपये थी। सिर्फ ईएमआई ही 54,200 रुपये की थी। वह अमीर नहीं जी रहा था। वह अपने भविष्य से एक लाइफस्टाइल उधार ले रहा था। सीए अभिषेक वालिया ने समझाया कि जब हर ऐश-ओ-आराम किश्तों में आता है, तो वह लग्जरी नहीं रह जाती, बल्कि एक लंबा बोझ बन जाती है। असली दिक्कत उस आदमी की पसंद में नहीं थी। दिक्कत उसकी टाइमिंग में थी। वह सब कुछ अभी चाहता था, भले ही उसके फाइनेंस इसके लिए तैयार न हों।

    जाल से बाहर निकलने के बताए टिप्स
    इस जाल से बाहर निकलने के लिए सीए अभिषेक वालिया ने उसकी सोच को 'पहले खरीदो' से बदलकर 'पहले बनाओ' कर दिया। नया प्लान सीधा और व्यवस्थित था। हर महीने 20,000 रुपये इमरजेंसी फंड के लिए, 15,000 रुपये एसआईपी में और ट्रैवल सिर्फ बोनस या निवेश से मिले रिटर्न से करना था। धीरे-धीरे, दबाव कम होने लगा।

    सिर्फ सात महीनों में उसकी ईएमआई 54,200 रुपये से घटकर 18,900 रुपये रह गई। उसकी पहली इंटरनेशनल ट्रिप का पेमेंट उसने पहले ही कर दिया था। उसका सेविंग रेट 8 प्रतिशत से बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया। उसने अपनी लाइफस्टाइल कम नहीं की। उसने बस उसे जीने का तरीका बदल दिया। सीए अभिषेक वालिया ने कहा कि बहुत से लोग इसलिए नहीं जूझते क्योंकि वे अच्छी चीजें चाहते हैं। वे इसलिए जूझते हैं क्योंकि वे उन्हें बहुत जल्दी चाहते हैं। दिक्कत लग्जरी में नहीं है। दिक्कत जल्दबाजी में है।

    क्या है 50-30-20 नियम?
    आर्थिक विशेषज्ञ ने बताया कि युवाओं को अपनी आय का उचित प्रबंधन करने के लिए 50-30-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यह नियम सरल है और हर वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी साबित हुआ है।

    – 50% – आवश्यक खर्च
    घर का किराया, खाना, सफर, बिजली-पानी, मोबाइल-इंटरनेट, बीमा और अनिवार्य चीज़ें।

    – 30% – इच्छाएँ
    घूमना-फिरना, बाहर खाना, शॉपिंग, मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च।

    – 20% – बचत एवं निवेश
    पीएफ एसआईपी, आरडी, इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट प्लानिंग आदि।

    इसी के साथ उन्होंने बताया कि यदि युवा इस नियम को अनुशासन के साथ अपनाएँ, तो न केवल कर्ज कम होगा बल्कि भविष्य सुरक्षित भी होगा।

    मुश्किल नहीं है, बस अनदेखी की आदत है
    युवा अक्सर मानते हैं कि वित्त प्रबंधन एक कठिन प्रक्रिया है और केवल बड़े लोगों या विशेषज्ञों का काम है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। अगर सही दृष्टिकोण और थोड़ी योजना अपनाई जाए, तो पैसा संभालना मुश्किल नहीं है।

    – महीने की शुरुआत में बजट बनाएँ
    – खर्च लिखने की आदत डालें
    – क्रेडिट कार्ड का उपयोग सीमित रखें
    – अनावश्यक सब्सक्रिप्शन खत्म करें
    – आपातकालीन फंड बनाएँ
    – डिजिटल ऐप से खर्च नियंत्रित करें

    कर्ज कम करने के स्मार्ट उपाय
    – सबसे महंगी ब्याज दर वाले कर्ज पहले चुकाएँ
    – इएमआई की संख्या न बढ़ाएँ, ब्याज घटाने पर ध्यान दें
    – क्रेडिट कार्ड के न्यूनतम भुगतान की भूल न करें
    – बचत में से थोड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगाएँ
    – नई खरीदारी तब तक रोकें, जब तक पुराना कर्ज समाप्त न हो जाए

    आर्थिक समझ ही असली ताकत है
    आज के समय में जिस तरह बदलती अर्थव्यवस्था, महँगाई और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, उसमें वित्तीय ज्ञान हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य हो गया है। अच्छा वित्त प्रबंधन करियर की सफलता जितना ही महत्वपूर्ण है। युवा यदि अपनी आदतों में थोड़ा-सा बदलाव लाते हैं, तो भविष्य सुरक्षित, तनावमुक्त और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। कर्ज, खर्च और दिखावे की संस्कृति मिलकर युवाओं को वित्तीय दबाव में ढकेल रहे हैं। लेकिन यदि 50-30-20 नियम को अपनाया जाए, खर्चों का आकलन किया जाए और बचत को प्राथमिकता दी जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।

     

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