Close Menu
New Agenda
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    NEW AGENDA
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • लाइफ स्टाइल
    NEW AGENDA
    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»रायपुर पुलिस कमिश्नर के पद के लिए आईजी स्तर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में
    छत्तीसगढ़

    रायपुर पुलिस कमिश्नर के पद के लिए आईजी स्तर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में

    AdminBy AdminDecember 24, 2025No Comments8 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    रायपुर पुलिस कमिश्नर के पद के लिए आईजी स्तर के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

     रायपुर
     रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अगले साल एक जनवरी को लेकर सरकार के भीतर मंत्रणा चल रही है। एक जनवरी को अगर ना भी हुआ तो उस दिन कम-से-कम नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। वैसे सरकार के लोगों की कोशिश है कि एक जनवरी से पुलिस के इस बड़े रिफार्म का आगाज हो जाए।

    हालांकि, एक जनवरी में टाईम काफी कम बच गया है। मुश्किल से हफ्ता भर समय है। किस प्रकार का पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा, इस पर भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालांकि, चाहेगी तो हफ्ता भर काफी है। अब ज्यादा लेट होने की गुंजाइश इसलिए नहीं है कि मुख्यमंत्री के ऐलान किए सवा साल से अधिका हो गया है। सीएम विष्णुदेव साय ने 15 अगस्त 2024 के भाषण में पुलिस कमिश्नर सिस्टम शुरू करने की घोषणा की थी। उनके ऐलान के बाद काफी वक्त निकल चुका है। इसलिए, अब ज्यादा विलंब करने का प्रश्न नहीं उठता।

    छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ करने चर्चाएं थीं मगर ऐन वक्त पर उसे टाल दिया गया। बाद में पता चला कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधयेक पारित कर एक्ट बनाया जाएगा। याने ओड़िसा की तरह काफी सशक्त पुलिस कमिश्नर प्रणाली बनाया जाएगा। किंतु उसके बाद विधानसभा का एक दिन का स्पेशल सत्र भी निकल गया और फिर शीतकालीन सत्र भी।

    रायपुर के फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए आईजी लेवल के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चाओं में हैं, उनमें पुलिस मुख्यालय में पोस्टेड अजय यादव, ब्रदीनारायण मीणा, बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला, दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और सरगुजा आईजी दीपक झा का नाम प्रमुख है। हालांकि, महिला आईजी के तौर पर एक नाम नेहा चंपावत का भी है। उन्होंने एलएलबी करने के बाद यूपीएससी क्रैक किया। सरकार को अगर फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए महिला आईपीएस जंचेगी तो उन्हें मौका मिल सकता है। नेहा तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं। एसपी के तौर पर उन्होंने सिर्फ एक जिला महासमुंद किया है। तेज महिलाएं पुलिस में सफल भी होती हैं, क्योंकि उनसे अकरण कोई हुज्जत नहीं करता। यद्यपि, रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा भी बेहतर चयन हो सकते हैं, मगर एसीबी और ईओडब्लू की जिम्मेदारियों के चलते सरकार शायद ही उनके नाम पर विचार करें। कोरबा में कुख्यात अपराधी का एककांउटर करने वाले सुंदरराज इस समय बस्तर आईजी हैं। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के चलते उन्हें सरकार अभी टच नहीं करेगी।

    पांच नामों की चर्चा सबसे अधिक

    रायपुर पुलिस कमिश्नर के लिए वैसे पांच आईपीएस अधिकारियों की चर्चा सबसे अधिक है। अब सरकार नेहा चंपावत जैसा कोई नया प्रयोग कर चौंका दें तो बात अलग है। मगर इन नामों पर जोर ज्यादा है। चलिये बताते हैं इन पांचों आईपीएस अधिकारियों के बारे में कौन, किस-किस जिले में एसपी, आईजी रहे….

    1. अजय यादव

    2004 बैच के आईपीएस अजय यादव सात जिलों के एसपी रहे। नारायणपुर से उनकी कप्तानी शुरू हुई थी, इसके बाद कांकेर, बिलासपुर जांजगीर, दुर्ग, रायपुर में एसएसपी रहे। प्रोफाइल के हिसाब से देखें तो अजय यादव काफी मजबूत स्थिति में हैं। वे रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा को मिलाकर तीन पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। इसके अलावा पुलिस महकमे में नेक्स्ट टू डीजीपी इंटेलिजेंस चीफ की भी पोस्टिंग वे कर चुके हैं।

    2. बद्रीनारायण मीणा

    2004 बैच के आईपीएस बद्री नारायण मीणा छत्तीसगढ़ में नौ जिले के एसपी रह चुके हैं। बलरामपुर से उनकी कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ। इसके बाद कवर्धा, राजनांदगांव, जगदलपुर, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग। बद्री चार पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। वे पहले आईपीएस अधिकारी होंगे, जो दुर्ग के साथ रायपुर के भी आईजी रहे। इसके बाद फिर बिलासपुर के आईजी बनाए गए। बिलासपुर के बाद उन्हें फिर दुर्ग आईजी का दायित्व सौंपा गया। याने तीन पुलिस रेंज में वे चार बार आईजी रहे। वे डेपुटेशन पर तीन साल तक आईबी में भी रहे।

    3. संजीव शुक्ला

    संजीव शुक्ला इस समय बिलासपुर पुलिस रेंज के आईजी हैं। वे पांच जिलों के पुलिस अधीक्षक रहे हैं। इनमें जशपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर शामिल है। वे नक्सल प्रभावित इलाका कांकेर के डीआईजी भी रह चुके हैं।

    4. रामगोपाल गर्ग

    2007 बैच के आईपीएस रामगोपाल गर्ग सात साल सीबीआई में डेपुटेशन पर रहने के कारण ज्यादा जिलों के एसपी नहीं रह सके। दिल्ली जाने के बाद वे गरियाबंद के एसपी रहे। और जब लौटकर आए तो डीआईजी बन चुके थे। उन्हें अंबिकापुर पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाकर भेजा गया। वहां से फिर रायगढ़ का डीआईजी। फिर विधानसभा चुनाव के समय दुर्ग के एसएसपी बने। चुनाव के बाद दुर्ग के प्रभारी आईजी बने और फिर पिछले साल प्रमोशन होने पर वहीं आईजी बन गए। रामगोपाल का कैरियर बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा। याने सरगुजा जैसे रेंज का आईजी रहने के बाद रायगढ़ का डीआईजी। इसके बाद दुर्ग का एसपी, फिर दुर्ग का प्रभारी आईजी, आईजी।

    5. दीपक झा

    2008 बैच के आईपीएस दीपक झा सात जिलों के एसपी रह चुके हैं। कोंडागांव से उनके कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ था, उसके बाद बालोद, महासमुंद, रायगढ़, जगदलपुर, बिलासपुर और फिर बलौदा बाजार। इसके बाद उन्हें नवगठित राजनांदगांव पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाया गया। पिछले साल उन्हें आईजी प्रमोट होने पर अंबिकापुर पुलिस रेंज के आईजी की जिम्मेदारी दी गई।

    नाम का पुलिस कमिश्नर

    पता चला है, एक जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ हो जाएगा। मगर इसके साथ यह भी जानकारी मिली है कि सोशल मीडिया और मीडिया में जो बातें चल रही हैं, उससे उलट सिर्फ नाम के लिए पुलिस कमिश्नर होगा। उसे प्रतिबंधात्मक धारा याने 151 के अलावा और कोई अधिकार देने के पक्ष में सिस्टम नहीं है।

    ओड़िसा सबसे बेस्ट

    देश में चूकि ओड़िसा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम ताजा लागू हुआ है, इसलिए उसका सिस्टम भी काफी तगड़ा है। ओड़िसा ने एक्ट बनाकर उसे क्रियान्वित किया है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में एक वर्ग मध्यप्रदेश से ज्यादा अधिकार पुलिस कमिश्नर को देना नहीं चाहता। जाहिर है, एमपी में आईएएस लॉबी के तगड़े विरोध के चलते दंतविहीन पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाया गया, जिसका प्रदेश को कोई लाभ नहीं मिल रहा। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब ओड़िसा की तत्कालीन नवीन पटनायक सरकार द्वारा बनाए गए सिस्टम को फॉलो करने पर मंत्रणा कर रहे हैं।

    अंग्रेजी शासन काल से पुलिस कमिश्नर

    पुलिस कमिश्नर सिस्टम अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। आजादी के पहले कोलकाता, चेन्नई और मुंबई जैसे देश के तीन महानगरों में लॉ एंड आर्डर को कंट्रोल करने के लिए अंग्रेजों ने वहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रभावशील कर रखा था। आजादी के बाद देश को यह वीरासत में मिली। चूकि बड़े महानगरों में अपराध बड़े स्तर पर होते हैं, इसलिए पुलिस को पावर देना जरूरी समझा गया। लिहाजा, अंग्रेजों की व्यवस्था आजाद भारत में भी बड़े शहरों में लागू रही। बल्कि पुलिस अधिनियम 1861 के तहत लागू पुलिस कमिश्नर सिस्टम को और राज्यों में भी प्रभावशील किया गया।

    कमिश्नर को दंडाधिकारी पावर

    वर्तमान सिस्टम में राज्य पुलिस के पास कोई अधिकार नहीं होते। उसे छोटी-छोटी कार्रवाइयों के लिए कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार, नायब तहसीलदारों का मुंह ताकना पड़ता है। दरअसल, भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के धारा 4 में जिले के कलेक्टरों को जिला दंडाधिकारी का अधिकार दिया गया है। इसके जरिये पुलिस उसके नियंत्रण में होती है। बिना डीएम के आदेश के पुलिस कुछ नहीं कर सकती। सिवाए एफआईआर करने के। इसके अलावा पुलिस अधिनियम 1861 में कलेक्टरों को सीआरपीसी के तहत कई अधिकार दिए गए हैं। पुलिस को अगर लाठी चार्ज करना होगा तो बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के वह नहीं कर सकती। कोई जुलूस, धरना की इजाजत भी कलेक्टर देते हैं। प्रतिबंधात्मक धाराओं में जमानत देने का अधिकार भी जिला मजिस्ट्रेट में समाहित होता है। कलेक्टर के नीचे एडीएम, एसडीएम या तहसीलदार इन धाराओं में जमानत देते हैं।

    तत्काल फैसला लेने का अधिकार

    महानगरों या बड़े शहरों में अपराध भी उच्च स्तर का होता है। उसके लिए पुलिस के पास न बड़ी टीम चाहिए बल्कि अपराधियों से निबटने के लिए अधिकार की भी जरूरत पड़ती है। धरना, प्रदर्शन के दौरान कई बार भीड़े उत्तेजित या हिंसक हो जाती है। पुलिस के पास कोई अधिकार होते नहीं, इसलिए उसे कलेक्टर से कार्रवाई से पहले इजाजत मांगनी पड़ती है। पुलिस कमिश्नर लागू हो जाने के बाद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाएंगे। इससे फायदा यह होगा कि पुलिस विषम परिस्थितियों में तत्काल फैसला ले सकती है। हालांकि, इससे पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।

    शास्त्र और बार लायसेंस

    पुलिस कमिश्नर सिस्टम में पुलिस को धरना, प्रदर्शन की अनुमति देने के साथ ही शस्त्र और बार का लायसेंस देने का अधिकार भी मिल जाता है। अभी ये अधिकार कलेक्टर के पास होते हैं। कलेक्टर ही एसपी की रिपोर्ट पर शस्त्र लायसेंस की अनुशंसा करता है। बार का लायसेंस भी कलेक्टर जारी करता है।

    मगर छत्तीसगढ़ में नहीं

    पुलिस कमिश्नर सिस्टम में उक्त सभी अधिकारी पुलिस को होते हैं मगर छत्तीसगढ़ में जो सिस्टम लागू होने जा रहा, वो सिर्फ रस्मी होगा। याने पुलिस कमिश्नर बनकर भी उसे एसपी से खास ज्यादा कोई अधिकार नहीं होगा। वो न तो बार का लायसेंस देखेगा और न ही शास्त्र लायसेंस। उसके पास जिला बदर के अधिकार भी नहीं होंगे।

    शेयर करें :-

    • Click to share on Facebook (Opens in new window)
    • Click to share on WhatsApp (Opens in new window)
    • Click to share on X (Opens in new window)
    • Click to share on Telegram (Opens in new window)
    Raipur Police Commissioner top-news
    Admin

    Related Posts

    मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात

    March 18, 2026

    आंगनबाड़ी केंद्रों में न्योता भोज कार्यक्रम: पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का व्यापक अभियान

    March 18, 2026

    योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय

    March 18, 2026

    यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में निवेश की गति तेज, तीन कंपनियों को मिली भूमि आवंटन

    March 18, 2026

    Khelo India Tribal Games: बस्तर बनेगा खेलों का गढ़, 1150 एथलीट्स का होगा दमदार प्रदर्शन

    March 18, 2026

    Heat Wave Alert: रायपुर में स्कूलों का समय बदला, बच्चों को मिलेगी गर्मी से राहत

    March 18, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    MP Info RSS Feed
    अन्य ख़बरें

    ट्रंप ने पलटी मारी, अमेरिका ने होर्मुज पर ईरानी मिसाइल भंडार पर गिराया भारी बम

    March 18, 2026

    मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात

    March 18, 2026

    आंगनबाड़ी केंद्रों में न्योता भोज कार्यक्रम: पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का व्यापक अभियान

    March 18, 2026

    योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय

    March 18, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक -दीपेन्द्र पाढ़ी
    मोबाइल -9329352235
    ईमेल -newagendaeditor@gmail.com
    मध्य प्रदेश कार्यालय -वार्ड क्रमांक 06, मोहगांव बिरसा, मोहगांव जिला-बालाघाट (म.प्र.)
    छत्तीसगढ़ कार्यालय-D 13, प्रियदर्शनी नगर के पास, पचपेड़ी नाका, रायपुर (छत्तीसगढ़)
    March 2026
    M T W T F S S
     1
    2345678
    9101112131415
    16171819202122
    23242526272829
    3031  
    « Feb    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.