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    Home»विदेश»ट्रेड डील का असर: रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत की बड़ी कटौती के संकेत
    विदेश

    ट्रेड डील का असर: रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत की बड़ी कटौती के संकेत

    AdminBy AdminFebruary 8, 2026No Comments4 Mins Read
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    ट्रेड डील का असर: रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत की बड़ी कटौती के संकेत
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    वाशिंगटन
    अमेरिका के साथ टैरिफ में कटौती के बदले हुए समझौते के तहत भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि, नायरा एनर्जी जैसी तेल शोधनशालाओं (रिफाइनरी) के पास सीमित विकल्प होने के कारण ये आयात फिलहाल पूरी तरह बंद नहीं होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को भारत से होने वाले सभी आयातों पर 25 प्रतिशत के दंडात्मक शुल्क को रद्द करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यह कदम नयी दिल्ली की उस प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है, जिसमें रूस से तेल आयात रोकने की बात कही गई है।

    रूस से खरीद कम करने की सलाह
    मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने बताया कि हालांकि तेल शोधनशालाओं को रूस से खरीद रोकने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है, लेकिन उन्हें अनौपचारिक रूप से मॉस्को से खरीद कम करने की सलाह दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश तेल शोधनशालाएं इस घोषणा से पहले की गई खरीद प्रतिबद्धताओं (आमतौर पर 6-8 सप्ताह पहले दिए गए ऑर्डर) का सम्मान करेंगी, लेकिन उसके बाद नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।

    इन कंपनियों ने बंद किया रूस से तेल आयात
    हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) भी अपनी खरीद धीरे-धीरे बंद करेंगे।

    भारत की सबसे बड़ी खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी अगले कुछ हफ्तों में 1,50,000 बैरल की खेप प्राप्त होने के बाद रूसी तेल की खरीद बंद कर सकती है जिसने पिछले साल के अंत में रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीदारी रोक दी थी। इस नियम का एकमात्र अपवाद 'नायरा एनर्जी' हो सकती है। रूसी संबंधों (नायरा में रोसनेफ्ट की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी) के कारण नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के कारण कोई अन्य बड़ा आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ व्यावसायिक लेनदेन नहीं करना चाहता, जिससे वह प्रतिबंधित नहीं की गई संस्थाओं से रूसी तेल खरीदने को मजबूर है।

    हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, वहीं वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने भी रूसी तेल खरीद के संबंध में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों ने कहा कि रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद से ही रूस से भारत का तेल आयात लगातार घट रहा है।

    दिसंबर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के दौरान नायरा की इस विशिष्ट स्थिति के बारे में बताया गया था। सूत्रों का कहना है कि नायरा को 'रूसी तेल न खरीदने' की नीति से छूट दी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि नायरा एनर्जी द्वारा निकट भविष्य में उन संस्थाओं से रूसी तेल की खरीद जारी रखने की संभावना है, जो प्रतिबंधों के दायरे में नहीं हैं।

    दिसंबर 2025 में रूस से आयात औसतन 12 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो मई 2023 के 21 लाख बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल रह गया और इस महीने या अगले महीने इसके 10 लाख बैरल से नीचे जाने की उम्मीद है। अमेरिका के साथ नयी समझौते के बाद यह आयात जल्द ही आधा हो सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस से मिलने वाले रियायती तेल ने भारत के आयात बिल को कम करने में मदद की है।

    केपलर के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, रूस से आने वाला तेल अगले 8-10 सप्ताह के लिए पहले से ही तय है और यह भारत की तेल शोधन प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (इक्रा) के प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि भारत के पास अमेरिका और वेनेजुएला जैसे पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।

     

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