लखनऊ
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की योजनाएं आज बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहीं हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ओडीओपी योजना ने न केवल पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान दी है, बल्कि छोटे उद्यमियों को भी आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा मंच प्रदान किया है।
झांसी की रहने वाली वंदना चौधरी इसी परिवर्तन की प्रेरक मिसाल हैं। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली वंदना ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस दिखाया। वर्ष 2021 में उन्होंने ओडीओपी योजना के अंतर्गत उन्हें 2 लाख का ऋण प्राप्त हुआ और उद्योग विभाग के माध्यम से सॉफ्ट टॉयज बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी मिला। प्रशिक्षण के बाद सरकार की पहल के तहत उन्हें निःशुल्क सिलाई मशीन भी मिली, जिसने उनके लिए स्वरोजगार की नई राह खोल दी।
कई शहरों की प्रदर्शनियों में लिया हिस्सा
शुरुआत में छोटे स्तर पर सॉफ्ट टॉयज बनाकर बेचने का काम शुरू करने वाली वंदना ने अपनी मेहनत और लगन से धीरे-धीरे अपने उत्पादों की पहचान बना ली। उनके बनाए रंग-बिरंगे और आकर्षक सॉफ्ट टॉयज ने लोगों का ध्यान खींचना शुरू किया। परिणामस्वरूप उन्हें प्रयागराज, हरिद्वार और अन्य शहरों में आयोजित प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में लिया हिस्सा
सरकार की योजनाओं से मिले इस प्रोत्साहन ने वंदना के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। इसी का परिणाम है कि उन्होंने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में अपने सॉफ्ट टॉयज की प्रदर्शनी लगाकर झांसी के हुनर को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राज्य सरकार की योजनाओं से मिले अवसरों का भी सशक्त उदाहरण है। वंदना ने बताया कि हमारे सॉफ्ट टॉयज की बिक्री लगभग सभी ट्रेड फेयर में होती है और उन्हें स्टाल लगाने से बिक्री भी बढ़ती है। अब तो वंदना और उनके पति ने मिलकर झांसी में एक दुकान 'श्री राधे सॉफ्ट टॉयज' के नाम से किराये पर ली है, उससे भी उनकी अच्छी कमाई हो जाती है। उनके साथ अब 20 से 25 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। वंदना के समूह का नाम है कर्मठ महिला स्वयं सहायता समूह जिसकी वह खुद अध्यक्ष हैं।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
वंदना चौधरी की कहानी यह बताती है कि जब सरकार की योजनाओं का लाभ सही दिशा में उठाया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। आज वंदना न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकीं हैं। उनकी यह यात्रा उत्तर प्रदेश में चल रही विकास और आत्मनिर्भरता की उस नई कहानी का हिस्सा है, जिसमें सरकार की पहल, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन से आम नागरिकों के सपनों को सच होने का अवसर मिल रहा है।
बड़े बाजार में नई पहचान
झांसी के उपायुक्त (उद्योग) मनीष चौधरी का कहना है कि भारत मंडपम जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी से न केवल उनके उत्पादों को बड़े बाजार में नई पहचान मिलती है बल्कि इससे प्रदेश की आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलती है।
