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    Home»राज्य»छत्तीसगढ़» घरेलू गैस की बर्बादी को रोकने जनजागरूकता जरूरी, शासन प्रशासन करे कड़ाई
    छत्तीसगढ़

     घरेलू गैस की बर्बादी को रोकने जनजागरूकता जरूरी, शासन प्रशासन करे कड़ाई

    By July 26, 2024No Comments8 Mins Read
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     घरेलू गैस की बर्बादी को रोकने जनजागरूकता जरूरी, शासन प्रशासन करे कड़ाई
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    बिलासपुर । घरेलु गैस सिलेंडर देश में हर घर में खाना पकाने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक बहुत ही सुरक्षित और गैर प्रदूषणकारी ईधन है। वर्तमान में देश में 75 प्रतिशत नागरीक इसका उपयोग घरेलु इस्तेमाल के लिए कर रहे है! लेकिन आज भी 20 प्रतिशत नागरिक लकड़ी के चुल्हे का ही उपयोग कर रहे है केवल 5 प्रतिशत नागरिक इलेक्ट्रीक उपकरण जैसे इंडक्शन स्टोव पर खाना पका रहे है।लकड़ी के उपयोग का दुष्परिणाम ये है जैसे वनो की कटाई, अस्थमा, फेफडो के रोग नेत्र रोग जैसी बिमारियों की संभावना के साथ ही पर्यावरण के लिए खतरनाक होता है। ईधन पर विचार करने के बाद एलपीजी सिलिंडर ही एकमात्र एक ऐसा ईंधन है, जिसे नागरिकों को अपने दैनिक जीवन में उपयोग करना चाहिए। लेकिन मौजुदा समय में घरेलु एलपीजी सिलेंडर की कीमत आम जनता की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
    घरेलु सिलेंडरो का अवैध इस्तेमाल बडे पैमाने पर हो रहा है! ग्राहक दक्षता कल्याण फाऊडेशन त्रष्ठ्यस्न के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन सोडंके के मार्गदर्शन में शुक्रवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में हंसराज रहांगडाले ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि 60 प्रतिशत घरेलु सिलेंडरो का उपयोग अवैध रूप से व्यावसायिक स्थानों पर किया जा रहा है और इसमें सीधे 14.2 कि.ग्रा. सिलेंडर का उपयोग 35 प्रतिशत है जबकि 16 कि ग्राम या फिर दुसरे कमर्शियल सिलेंडरों में क्रूड बिल का 25 फीसदी हिस्सा ट्रांसपोर्ट के जरीये खतरनाक तरीके से घुमाकर बाजार में खपाया जा रहा है।
    देश में एलपीजी वाहनो में घरेलु सिलेंडर का भी खतरनाक तरीके से उपयोग किया जा रहा है। ऑटो एलपीजी वाहन की दैनिक खपत की तुलना में 70 प्रतिशत वाहन चालक इलेक्ट्रिक मोटर पंप की मदद से घरेलु सिलेंडर में बेहद खतरनाक तरीके से एलपीजी भरते है। इससे बड़े हादसे भी हो चुके है लेकिन ऑटो एलपीजी पंपों से सिर्फ 30 फीसदी अधिकृत एलपीजी बेची जा रही है।वाहनो की कुल संख्या अनुमानित 2.38 मिलियन है और हर दिन नए एलपीजी वाहन बढ रहे है! क्योंकि एलपीजी एक सुरक्षित, गैर प्रदुषणकारी ईधन है जो पेट्रोल और डीजल से सस्ता है! आज ऑटो एलपीजी 52/- रूपये प्रति लीटर बिकता है और इसका माइलेज भी अच्छा रहता है। मंगलदोई लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद दिलीप सैकिया द्वारा पुछे गये एक सवाल के जवाब में लोकसभा में बताया गया कि एलपीजी से जुडी सभी दुर्घटनाओ की जांच सार्वजनिक क्षेत्र की विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा की जाती है!
    पिछले 5 वर्षों में दुर्घटनाओं के आकडे लगभग 5131 है, जिनमें सबसे अधिक दुर्घनाएँ 2016-2018 में हुई है। उपरोक्त सभी आकडो को ध्यान में रखे तो हर साल औसतन एक हजार दुर्घटनाएं होती है! ये सभी आकडे चौकाने वाले है! इंसान की जान खतरे में है! अवैध एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल से कई मौते होती है! सरकारी राजस्व को भी करोडो रूपये नुकसान हो रहा है! जो परिवार ऐसी दुर्घनाओ से पीडित है, उनके मामले सरकार या बीमा कंपनियो से मुआवजा देकर रफादफा कर दिए जाते है! इन सभी समस्याओ के लिए अवैध एलपीजी की बिक्री ही जिम्मेदार है! क्योकि दुघर्टनाओ मे मरने वाला परिवार का सदस्य हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाता है! आइए यह भी समझे कि जीएसटी से सरकारी खजाने को करोडो रूपये का कैसे नुकसान हो रहा है।
    14.2 किलो घरेलु गैस सिलेंडर पर सरकार सिर्फ 5 फिसदी जीएसटी लगाती है, जबकि 16 किलो और 5 किलो के कमर्शियल गैस सिलेंडर पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है! साथ ही ऑटो एलपीजी यानी वाहनो में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी पर भी 18 फिसदी जीएसटी लगता है! इसलिए सरकार को घरेलु एलपीजी सिलेंडर की बिक्री से हर साल करोडो रूपये का जीएसटी मिलता है! इसकी अवैध बिक्री रोखने से जीएसटी के रेवेन्यु में बढ़ोतरी हो सकती है! दावे के मुताबिक, व्यावसायिक कार्यों के लिए आवश्यक एलपीजी कुल 18 फिसदी है और मौजुदा स्थिती में निजी एलपीजी कंपनियो की हिस्सेदारी 10.2 फिसदी है! साथ ही देश में एलपीजी से चलने वाले वाहनों की कुल संख्या लगभग 2.38 मिलियन है वे प्रतिदिन औसतन 8.52 मिलियन लिटर एलपीजी की खपत करते है और 2.8 मिलियन की खपत देश के अधिकारीक एलपीजी पंपो से होती है। यह करीब 2.38 मिलियन है उन्हे प्रतिदिन औसतन 6.52 लाख एलपीजी गैस की जरूरत होती है क्योंकि देश में अधिकारीक एलपीजी पंपो से 4 लीटर और 3.8 लाख गैस की खपत हो रही है! औसतन 3.1 मिलियन किलोग्राम/टन गैस का अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा है। इसलिए जैसा कि उपर बताया गया है, यह स्पष्ट है कि सरकार को 13 प्रतिशत जीएसटी के माध्यम से लगभग 3.1 मिलियम का नुकसान हो रहा है! आइए जानते है देश में सरकारी कंपनियो की एलपीजी खपत किस सेक्टर में कितनी है और इसका ऑटो एलपीजी कारोबार पर क्या असर पड़ेगा !
    1. घरेलु गैस सिलेंडर की बिक्री हिस्सेदारी 86 फिसदी है!
    2. वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की बिक्री हिस्सेदारी 6.1 प्रतिशत है!
    3. सिविल क्षेत्र में (थोक) बिक्री की हिस्सेदारी 1.4 प्रतिशत है!
    4. ऑटो एलपीजी यानी गाडीयो में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की बिक्री की हिस्सेदारी 0.4 प्रतिशत है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऑटो एलपीजी की खपत दिन-ब-दिन कम होती जा रही है! लेकिन, ऑटो विक्री बढ रही है! साथ ही ऑटो एलपीजी पंप भी कम होते जा रहे है! 2021 में यह संख्या 601 थी और 2022 में यह संख्या गिर कर 516 हो गई! इसका कारण घरेलु गैस सिलेंडर की बढ़ती खपत है। 2022 में एलपीजी वाहनो में गैस सिलेंडरो का अवैध रूप से व्यापक रूप से उपयोग किया गया! तेल कंपनिया इसे नजर-अंदाज कर रही है! साथ ही उपर दिए गए कमर्शियल, गैस सिलेंडर की खपत को देखते हुए इसकी मात्रा भी कम हो रही है! इसका कारण यह है की कमर्शियल सिलेंडर मंहगे होते जा रहे है! कमर्शियल लोग घरेलु गैस सिलेंडर का चोरी-छिपे इस्तेमाल करते है! प्रशासन द्वारा भी इस और ध्यान नही दिया जा रहा है! देश में कुल 40.98 घरेलु गैस सिलेंडर से जुडे हुए है और प्रत्येक कनेक्शन उपभोक्ता को प्रतिवर्ष 12 सिलेंडर सब्सिडी से मिलता है! हालांकि 12 सिलेंडर उपभोक्ताओ की संख्या से कम है। सरकारी आंकडो के मुताबिक एक परिवार करीब 10 से 11 गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करता है! लेकिन, इस आकडे की जांच की जाती है कि यह कहां तक सच है और उज्वला योजना के उपभोक्ताओं का एक सर्वेक्षण किया जाता है! तो उस सर्वेक्षण में औसतन 80 प्रतिशत नागरिक 5 से 6 गैस सिलेंडर का उपयोग करते है, जबकि 15 प्रतिशत नागरिक 8 से 6 सिलेंडर का उपयोग करते है! गैस के दाम बढऩे से 5 फिसदी लोग 2 से 3 सिलेंडर ही इस्तेमाल कर रहे है! लेकीन उस ग्राहक के बाकी गैस सिलेंडर वितरक ऑटो बुक करके कालाबाजारी कर रहे है। इस अवैध बिक्री से मोटी रकम कमा रहे है! वे इस व्यवसाय को एकाधिकार के रूप में चला रहे है! यह देश के लिए हानिकारक है। संघ के सत्यप्रकाश शाहु, ने बताया की देश में एलपीजी सिलेंडरों की उचित विक्री के उद्देश से केंद्र सरकार ने हाल ही में कुछ कदम उठाए है! लेकीन इसकी गती काफी धीमी है।घरेलु एलपीजी सिलेंडर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा खरीदे जाते तथा उनकी देखभाल की जाती है! ग्राहक द्वारा भुगतान की गई सुरक्षा जमा राशि पर सिलेंडर उधार दिया जाता है! पुर्वानुमानित मांग और संचालन के अनुकुल के आधार पर एलपीजी वितरण प्रणाली में दक्षता लाने के उददेश से संपुर्ण आपुर्ति श्रृखंला और सिलेंडर इन्वेंट्री का प्रबंधन ओएमसी द्वारा किया जाता है! अन्य बातों के साथ साथ एलपीजी उपभोक्ताओ को हल्के वजन वाले सिलेंडरों की आपुर्ती/चोरी रोकने के लिए ओएमसी द्वारा कई कदम उठाए गए है।
    सिलेंडर बिना सब्सिडी वाले मुल्य पर बेचे जाते हैं! और सब्सिडी एलपीजी उपभोक्ताओं पर लागु होती है। सब्सिडी सीधे ग्राहक के बैंक खाते में, आधार ट्रांन्सफर कंप्लायंट (बीटीसी) मोड के माध्यम से स्थानांतरित की जाती है! अगस्त 2021 से, डीबीटीएल के लिए सब्सिडी भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से प्रशासित किया जा रहा है! पीएफएमएस एक कुशल निधि प्रवाह प्रणाली है जो भुगतान सह लेखा नेटवर्क स्थापित करके भारत सरकार के लिए मजबुत सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करता है! भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के हिस्से के रूप में पीएफएमएस एक वास्तविक समय, विश्वसनीय और सार्थक प्रबंधन सुचना प्रणाली और एक प्रभावी निर्णय समर्थन प्रणाली प्रदान करता है! डीबीटीएल ने भुत खातो, एकाधिक खातो और निष्क्रीय खातो की पहचान करने में मदद करता है! इससे वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए सब्सिडी वाले एलपीजी के उपयोग पर अंकुश लगाने मदद मिली है! गुम या डुप्लीकेट कनेक्शन के कारण 4 करोड से अधिक घरेलु एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक कर दिए गए है! साथ ही, देश भर में 1.1 करोड से अधिक एलपीजी उपभोक्ता ने अभियान के तहत अपनी सब्सिडी माफ कर दी है! हम सरकार से बारकोर्डिंग, क्युआर कोड ट्रैकिंग को जल्द लागू करने का आग्रह करते है! इसका किसी को विरोध नही करना चाहिए! इससे देश मे एलपीजी सिलेंडरो की अवैध विक्री में कमी आएगी और घरेलु दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी और देश के राजस्व में वृद्धि होगी।

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