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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है
    मध्यप्रदेश

    आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है

    AdminBy AdminOctober 21, 2024No Comments5 Mins Read
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    आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है
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    आरक्षण और निर्वाचन: आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है

    भारत में आज आरक्षण और निर्वाचन दोनों विषयों पर निरंतर बहस जारी है साथ ही दोनों विषयों पर जनता संदेह करती ही रहती है।

    आज के समय में दोनों विषयों पर चर्चा और विश्वसनीयता बनाना सरकार का पहला कदम होना चाहिए।

    आरक्षण –देश में आरक्षण कमजोर और भेद भाव और पीढ़ी दर पीढ़ी अस्पर्शता का दंश झेल रहे अनु जाति जन जाति और पिछड़े वर्गों को सामाजिक,आर्थिक, राजनेतिक स्तर पर बराबरी पर लाने के लिए ये व्यवस्था भारतीय संविधान में अंकित किया गया जिससे देश में कमजोर अनु जाति, जन जाति वर्ग को सम्मानजनक जीवन मिल सकें।
    परंतु समय के साथ साथ इन वर्गों को समान अवसर जरुर मिले पर इसके साथ साथ उनके साथ अत्याचार, भेद भाव, और अन्याय भी बढ़ते गए।

    आज भी देश में इंसान को इंसान की नज़र से देखने वाले कम है।आज राजनीतिक रूप से भी उचित स्थान इन वर्गों को नहीं मिला।

    आरक्षण और वर्तमान
    भारत में 1950 मै जब आरक्षण विधेयक पारित हुआ तो उसके साथ ही अनु जाति जन जाति पिछड़ा वर्ग को शासकीय सेवाओं, राजनीतिक पार्टियों और निर्वाचन क्षेत्रों में ये व्यवस्था लागू हो गई।
    इसका मुख्य कारण ये रहा की इन वर्गों को देश में कभी समान अवसर नहीं मिले ना ही इन वर्गों का खान पान और रहवास अन्य वर्ग के समान सुखद नहीं रहा आज भी इन वर्गों की बस्तीया टोला, मढिया, हरिजन बस्ती हरिजन वार्ड, आदिवासी मुहल्ला, टीला, मलिन बस्तियों, और गरीब बस्तीयो, के विभिन्न नामों से पुकारी जाती है।

    इन वर्गों की आबादी में आज भी केवल चुनाव और मुख्य वजह पर ही सरकार की नज़र जाती हैं।
    परंतु समय के साथ इन वर्गों के अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता की कमी के कारण इसका दुरुपयोग प्रारम्भ हो गया।बड़े ही शर्म की बात है की किसी भी वर्ग का व्यक्ति अनु जाति जन जाति वर्ग का प्रमाण पत्र बनवा कर विधायक, मंत्री, सरपंच, आदि बन जाता है जब तक ये जानकारी लगती है या न्यायलाय द्धारा फर्जी सिद्ध होता है जब तक वो कार्यकाल पूरा कर लेता है।

    अनेक व्यक्ती सामान्य वर्ग के अनु जाति, जन जाति वर्ग से विवाह देखा कर पति पत्नी के रुप में रहकर इस आरक्षण का लाभ उठा लेते हैं।
    वास्तविक स्वरूप में बहुत कम पात्र जरुरतमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिल पाता है।आरक्षण के वर्तमान समय में आरक्षण मै महिला वर्ग, दिव्यांगजन भी आरक्षित वर्ग से आउटसोर्स, संविदा, निजीकरण, ठेकेदारी प्रथा ने इन वर्गों को समान अवसर समान अधिकारो का हनन किया है।

    भारतीय जनता पार्टी नित सरकार द्वारा 10% EWS आरक्षण देकर वर्ष 2019 मै अनु जाति जन जाति वर्ग को, कही ना कहीं रोका गया है।
    अनु जाति जन जाति वर्ग पर लागू हित साधन अनु जाति जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के आदेश पर भी जो घटना 2अप्रैल 2018 को प्रदर्शन देश भर में हुआ वो भी एक इस वर्ग को चिंता मत मै किए हैं।आज वर्ष 2024 मै भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनु जाति जन जाति वर्ग में आरक्षण मै उपवर्गीकरण भी इस वर्ग को आरक्षण से दूर करने को असंकित करता है।

    आज देश में लेट्रिंग से लेकर कैटरिंग तक सभी जगह निजीकरण ठेकेदारी हावी है। देश में विशेष वर्ग आज भी संपन्न है और ये वर्ग पिछड़े है। आज अमीर और गरीब मै जमीन आसमान का अन्तर हो गया है। देश में एनजीओ, सहकारिता, निजीकरण, और पूंजीवाद हावी है।
    जिस से इन वर्गों के अधिकारों का निरंतर हनन हो रहा है। निर्वाचन -भारत में निर्वाचन को लोकतंत्र की प्रमुख हिस्सा माना गया है। जिस नागरिक ने भारत में जन्म लिया है वो 18 वर्ष पूर्ण करने पर देश का ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर मतदाता होता है।

    और 25 वर्ष में प्रत्याशी के रुप में देश में  लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को विशेष अधिकारो को दिए गए हैं जिसमें मतदान भी है।
    आज देश के लिए एक चिंतनीय विषय बहुत बड़ा है वो है निर्वाचन आयोग के कार्यों पर विश्वयनीयता । महंगे चुनाव, धन आधारित चुनाव मैदान, लोक सभा, विधान सभा में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त और धनवान लोगों का जाना कहीं ना कहीं निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं।

    EVM जब देश में निर्वाचन के लिए उपयोग में लाई गई थी तब देश में तकनीकी ज्ञान और तकनीक का इतना विकास नहीं हुआ था।
    आज हर एक दल निर्वाचन आयोग को ईवीएम मशीनों को लेकर लागतार शिकायत दर्ज करता रहता है।

    इसी प्रकार से वीपीपीटी पर्ची के ईवीएम से मतदान के साथ 100% मिलान की मांग होती रही है। साथ ही पुनः ईवीएम मशीन के मतगणना में लगने वाली 47000 रु प्रति ईवीएम मशीन की राशि कम करने की मांग होती रही है। वैलेट पेपर से चुनावों को कराने की मांग आज के समय में सम्भव भी है क्योंकि आज हमारे पास परिवहन के संसाधन है पोलिंग बूथों पर सीसीटीवी कैमरों जिसे व्यवस्था है जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम है। पारदर्शिता के लिए सभी संसाधन मौजूद है।
    अब इन निर्वाचन मुद्दों के साथ एक देश एक चुनाव पर भी विचार हो रहा है।

     एक देश एक चुनाव क्या ये सही है

    एक बार वोट दो और जनता 5 साल को फुर्सत।

    मतलब चुनाव के बाद आप सरकार से सवाल जवाब करे पर वोट रूपी वरदान को नजरंदाज कर।

    एक देश एक चुनाव के बाद कही एक चरण में मतदान भी लागू ना हो जाए।

    फिर क्या जब जनता को समझाने में वर्षो लग जाते है फिर एक दिन में चुनाव संपन्न करना कही ना कहीं संदेह के परे है।

    आज देश में ब्लू टुथ, AI , GPS, ड्रोन जिसे उपकरण चलने लगे हैं आज इलेक्ट्रोल बॉन्ड भी निर्वाचन मै एक रिश्वत भ्रष्टाचार का आधार बनता दिख रहा है। समय रहते हमें लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभों की रक्षा करना ज़रूरी है एवं आधुनिकता के साथ जनता में विश्वास बनाएं रखना सरकार का कर्तव्य है।
         हेमन्त आजाद
    स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार
           मध्य प्रदेश

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