Close Menu
New Agenda
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    NEW AGENDA
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • लाइफ स्टाइल
    NEW AGENDA
    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»गीता जयंती विशेष: सनातन संस्कृति की ध्वजा विश्व में फहरा रही गीता प्रेस
    मध्यप्रदेश

    गीता जयंती विशेष: सनातन संस्कृति की ध्वजा विश्व में फहरा रही गीता प्रेस

    AdminBy AdminDecember 10, 2024No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    गीता जयंती विशेष: सनातन संस्कृति की ध्वजा विश्व में फहरा रही गीता प्रेस
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन है गीता प्रेस

    हितानंद  शर्मा

    धर्म स्थापना के लिए मानव इतिहास में हुए सबसे भीषण महायुद्ध के बीच भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान आज भी अमृत रूप में प्रवाहित हो रहा है। श्रीमद्भगवत गीता केवल अर्जुन के लिए नहीं, सनातन समाज के लिए नहीं बल्कि विश्व मानवता के शुभ के लिए ईश्वरीय संदेश है। गीता के माध्यम से व्‍यक्‍त‍ि स्‍वयं को जान सकता है और ईश्वरीय सत्ता का अनुभव भी कर सकता है। गीता जयंती मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह वही दिन है जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।

    गीता के ईश्वरीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य ‘गीता प्रेस गोरखपुर’ द्वारा पिछले 102 वर्षो से बिना रुके पूरे श्रद्धाभाव से किया जा रहा है। भारत के घर-घर में श्रीमद्भगवत गीता और रामायण की प्रति पहुंचाने का श्रेय गीता प्रेस को ही जाता है। गीता प्रेस अब तक श्रीमद्भगवत गीता की 16 करोड़ 21 लाख प्रतियां प्रकाशित कर श्रद्धालु पाठकों तक पहुंचा चुका है।

    अब तक  41 करोड़ 71 लाख पुस्तकें छापकर विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन संस्थान होने के बाद भी आश्चर्य की बात यह है कि गीता प्रेस न तो किसी से चंदा लेता है और न ही अपने प्रकाशनों में विज्ञापन ही स्वीकार करता है। जब वर्ष 2021 में गीता प्रेस को उसके उल्लेखनीय कार्यों के लिए भारत सरकार का गरिमामय ‘महात्मा गांधी शांति पुरस्कार’ प्रदान किया गया तो संस्थान ने पुरस्कार को पूरे सम्मान के साथ ग्रहण किया, पर इसके साथ प्रदान की जाने वाली एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि सरकार को वापस लौटा दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी इस संस्थान के दर्शन के लिए आए थे। लागत मूल्य से 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर बहुमूल्य  पुस्तकें पाठकों तक पहुंचाने वाला गीता प्रेस वास्तव में सामाजिक-धार्मिक जागरण का एक आंदोलन ही है।

    भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की पावन धरा उत्तरप्रदेश का प्रवास तो पूर्व में भी होता ही रहा है किन्तु इसी वर्ष संयोग से संगठन के कार्य से मुझे गोरक्ष प्रांत यानी गोरखपुर सहित आसपास के क्षेत्रों का प्रभार सौंपा गया। ऐसे में गोरखपुर में गोरक्ष पीठ सहित एक महत्वतपूर्ण तीर्थ गीता प्रेस के दर्शन का सौभाग्य भी मिला। प्रकाशन का केंद्रीय कार्यालय गोरखपुर में ही है। हिन्दू  धर्म, अध्यात्म, दर्शन सहित मानव कल्याण के अनेक विषयों पर पुस्तकें प्रकाशित कर चुका गीता प्रेस आधुनिक समय का तीर्थ ही है। राजा भागीरथ के महान तप से पुण्य प्रवाहिनी मां गंगा का धरती पर अवतरण संभव हो सका था। इक्ष्वाकु वंश के राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने का प्रण पूर्ण किया था। इसी प्रकार गीता प्रेस के संस्थापक, ब्रह्मलीन श्री जयदयालजी गोयंदका के ऐसे ही महान तप का सुफल यह प्रकाशन है। वैसे तप तुलना का विषय नहीं है किन्तु  धर्म, संस्कृति, अध्यात्म, भक्ति एवं मानवता के उद्धार के लिए गोयंदका जी द्वारा स्थापित गीता प्रेस आज भी पुण्य प्रवाहमयी ज्ञान सरिता है।

    गीता प्रेस के आदि संपादक श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार ‘भाईजी’ के उल्लेख के बिना गीता प्रेस की चर्चा पूर्ण नहीं होगी।  भाईजी वीर सावरकर के निकट के क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। अपने मौसेरे भाई जयदयालजी के अगाध गीता प्रेम एवं ज्ञान को देखते हुए भाईजी ने श्रीमद्भगवत गीता को लागत मूल्य से भी कम में जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस संकल्प की पूर्ति के लिए अपने एक प्रकाशन की आवश्यकता थी जो गोरखपुर में प्रारंभ हुआ। प्रचार-प्रसार से दूर एक अकिंचन सेवक और निष्काम कर्मयोगी की तरह भाईजी ने सनातन संस्कृति की मान्यताओं को घर-घर तक पहुँचाने में जो अतुलनीय योगदान दिया है, इतिहास में इसका उदाहरण मिलना कठिन है।
     
    गीता  प्रेस  का मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म के सिद्धांतों को गीता, रामायण, उपनिषद, पुराणों, प्रख्यात संतों के प्रवचन एवं चरित्र-निर्माण की अन्य पुस्तकें-पत्रिकाएं प्रकाशित कर इन्हें लागत मूल्य से भी कम कीमत में समाज में पहुंचाना है। गीता प्रेस मानव जीवन के उत्थायन और सभी की भलाई के लिए प्रयासरत है। इसका उद्देश्य शांति, आनंद और  मानव जाति के अंतिम उत्थान के लिए गीता में प्रतिपादित जीवन जीने की कला को बढ़ावा देना है।

    संस्थान का संचालन कोलकाता के गोविंद भवन द्वारा किया जाता है। इसका प्रबंधन एक गवर्निंग काउंसिल (ट्रस्ट बोर्ड) करती है। गीता प्रेस में दिन की शुरुआत सुबह की प्रार्थना से होती है। एक व्यक्ति दिनभर घूम-घूम कर प्रत्येक कार्यकर्ता को कई बार भगवान का नाम स्‍मरण कराता है। गीता प्रेस के अभिलेखागार में भगवद् गीता की 100 से अधिक व्याख्याओं सहित 3,500 से अधिक पांडुलिपियां रखी हैं। गीता प्रेस के मासिक पत्रिका ग्रंथ ‘कल्याण’ के नए संस्करण के साथ 3000 से अधिक ऑनलाइन संग्रह उपलब्ध हैं। 4 मई 1923 को गीता प्रेस की स्थापना की गई थी तब पुस्तकें छापने का काम बोस्टन कंपनी की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू किया गया था। पैरों से चलाई जाने वाली यह मशीन 500 रुपए में अमेरिका से मंगवाई गई थी। अब संस्थान आधुनिक संसाधनों का सदुपयोग करता है इसीलिए मैनुअल और मशीन दोनों माध्यमो से प्रकाशन का काम होता है। गीता प्रेस इन अर्थों में भी विश्व का अनूठा प्रकाशन है क्योंकि यह अपनी पुस्तकों में मात्रात्मक, व्याकरणिक, शाब्दिक अथवा तथ्यात्मक त्रुटि बताने वाले को पुरस्कृत करता है हालाँकि पुस्तकों में ऐसी त्रुटियां मिलती नहीं हैं।

    बीते वर्षों में मीडिया में इस प्रकार के समाचार आए थे कि गीता प्रेस आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बंद होने की कगार पर है किन्तु संस्थान के भ्रमण में यह भी जानने मिला कि स्थिति ऐसी नहीं है। समाज के सहयोग से गीता प्रेस 300 करोड़ रुपए वार्षिक टर्न ओवर वाला समृद्ध संस्थान है और प्रति वर्ष 17 भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित कर रहा है। संस्थान ने अपनी पुस्तकें इंटरनेट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध कराई हैं जहां से कोई भी इन्हें  डाउनलोड कर सकता है और यह पूरी तरह निशुल्क है।

    संस्थान का कार्यालय भी दर्शनीय है। इसके भव्य प्रवेश द्वार के स्तंभ एलोरा के प्राचीन गुफा-मंदिर के स्तंभों की शैली में निर्मित हैं। वहीं अर्जुन के रथ के सारथी बन श्रीकृष्ण गीता का उपदेश दे रहे हैं। प्रवेश द्वार का शिखर दक्षिण भारत के मीनाक्षी मंदिर के शिखरका स्मरण कराता है। इस प्रवेश द्वार का उद्घाटन 29 अप्रैल, 1955 को प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। संस्थान के परिसर में लीला चित्र मंदिर (आर्ट गैलरी) में 684 सुंदर चित्रों में भगवान राम और भगवान कृष्ण की लीलाओं को प्रदर्शित किया गया है। ये अलग-अलग समय के महान कलाकारों की कृतियां हैं। इनके अलावा अन्य पेंटिंग भी प्रदर्शित हैं। श्री कृष्ण लीला को दर्शाने वाली पुरानी मेवाड़ी शैली की 92 पेंटिंग दर्शनीय है। दीवारों पर संगमरमर के ब्लॉकों पर पूरी गीता उकेरी गई है, साथ ही लगभग 700 दोहे और संतों के छंद भी हैं।

    गीता प्रेस आधुनि‍क समय में हिन्दू धर्म, संस्कृति की पताका पूरे विश्व में फहरा रही है। जब भी बात हिन्दू धर्म के महान ग्रंथों की होती है तो सहज ही गीता प्रेस का नाम ध्यान में आ जाता है। आज की घोर व्यावसायिकता के युग में गीता प्रेस लोक कल्याण की भावना से प्रामाणिक पुस्तकें समाज को उपलब्ध करा रहा है। गीता प्रेस की यह पुण्य सलिला निरंतर प्रवाहमान रहने वाली है।

    (ले‍खक भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश संगठन महामंत्री हैं)

    शेयर करें :-

    • Click to share on Facebook (Opens in new window)
    • Click to share on WhatsApp (Opens in new window)
    • Click to share on X (Opens in new window)
    • Click to share on Telegram (Opens in new window)
    Gita Jayanti
    Admin

    Related Posts

    MP: प्राइवेट स्कूलों को मान्यता का अंतिम अवसर, 10 मार्च तक 20 हजार लेट फीस के साथ आवेदन संभव

    March 6, 2026

    दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर मुठभेड़: ₹5 लाख का इनामी माओवादी ढेर, बरामद हुए बड़े पैमाने पर हथियार

    March 6, 2026

    राय जगदलपुर में बजट 2026-27 की योजना, नगर निगम ने सड़क, नाली-पानी और सफाई पर मांगी जनता की राय

    March 6, 2026

    बिलासपुर के 3 दोस्त 9 दिन से दुबई में फंसे, फ्लाइट कैंसिल होने से वापसी में देरी, परिजनों ने भारत सरकार से सहायता की अपील

    March 6, 2026

    CM योगी आदित्यनाथ और RSS के 3 दर्जन से ज्यादा पदाधिकारियों के बीच बंद कमरे में हुई गहरी बातचीत

    March 6, 2026

    रायपुर: दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा राज्य नीति आयोग: मुख्यमंत्री साय

    March 6, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    MP Info RSS Feed
    अन्य ख़बरें

    MP: प्राइवेट स्कूलों को मान्यता का अंतिम अवसर, 10 मार्च तक 20 हजार लेट फीस के साथ आवेदन संभव

    March 6, 2026

    दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर मुठभेड़: ₹5 लाख का इनामी माओवादी ढेर, बरामद हुए बड़े पैमाने पर हथियार

    March 6, 2026

    ट्रंप की करारी शिकस्त, अमेरिका को ₹16 लाख करोड़ का फटका, भारत को मिल रही राहत

    March 6, 2026

    राय जगदलपुर में बजट 2026-27 की योजना, नगर निगम ने सड़क, नाली-पानी और सफाई पर मांगी जनता की राय

    March 6, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक -दीपेन्द्र पाढ़ी
    मोबाइल -9329352235
    ईमेल -newagendaeditor@gmail.com
    मध्य प्रदेश कार्यालय -वार्ड क्रमांक 06, मोहगांव बिरसा, मोहगांव जिला-बालाघाट (म.प्र.)
    छत्तीसगढ़ कार्यालय-D 13, प्रियदर्शनी नगर के पास, पचपेड़ी नाका, रायपुर (छत्तीसगढ़)
    March 2026
    M T W T F S S
     1
    2345678
    9101112131415
    16171819202122
    23242526272829
    3031  
    « Feb    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.