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    Home»व्यापार»शेयर बाजार में मची हाहाकार, इन 5 कारणों से आई गिरावट, डूब गए ₹5 लाख करोड़
    व्यापार

    शेयर बाजार में मची हाहाकार, इन 5 कारणों से आई गिरावट, डूब गए ₹5 लाख करोड़

    AdminBy AdminJanuary 21, 2025No Comments6 Mins Read
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    शेयर बाजार में मची हाहाकार, इन 5 कारणों से आई गिरावट, डूब गए ₹5 लाख करोड़
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    मुंबई

    भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार 21 जनवरी को भारी गिरावट आई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 1% से अधिक टूट गए। कारोबार बंद होने के करीब आधे घंटे पहले सेंसेक्स ने 1227 अंक का गोता लगाया और ये फिसल कर 75,845 के लेवल पर आ गया जबकि निफ्टी 332 अंक लुढ़क कर 23,012 के लेवल पर था। इस दौरान निवेशकों के करीब 5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।

    वहीं कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1235 अंक टूटकर 75,838 अंक और निफ्टी 320 अंक का गोता लगाकर 23,024 के स्तर पर बंद हुआ।

    सबसे ज्‍यादा टूटे ये 10 शेयर

     

    •     Dixon Tech के शेयर 14 प्रतिशत टूटकर 15,144 रुपये पर बंद हुए.
    •     कल्‍याण ज्‍वैलर्स के शेयरों (Kalyan Jewellers Share) में 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और यह 488 रुपये पर क्‍लोज हुआ.
    •     ओबरॉय रियल्‍टी के शेयर 7.23 फीसदी गिरकर 1858 रुपये पर बंद हुआ.
    •     Kaynes Tech के शेयर 9.61 फीसदी गिरकर 5977 रुपये पर बंद हुआ.
    •     MCX के शेयरों की बात करें तो यह 8.66 फीसदी गिरकर 5504 रुपये पर क्‍लोज हुआ.
    •     अंबर इंटरप्राइजेज स्‍टॉक में 7.58 फीसदी की गिरावट आई और यह 6515 रुपये पर बंद हुआ.
    •     लार्जकैप स्‍टॉक में जोमैटो के शेयर 10.51 फीसदी गिरा, ट्रेंट के शेयर 5.80 प्रतिशत, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज 5.66 प्रतिशत और मार्कोटेक देव टेक के शेयर 5 फीसदी टूटे.

    इन पांच वजहों से गिरा बाजार

    टैरिफ बढ़ोतरी पर ट्रंप का बयान
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ चार्ज बढ़ाने से भारतीय शेयर बाजार भी सहमा दिखाई दिया. निवेशक नीतिगत बदलावों की चिंता से सतर्क दिखाई दिए. ट्रंप का प्रशासन 1 फरवरी से मैक्सिको और कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे उनके उद्घाटन भाषण से शुरुआती आशावाद के बाद देरी की उम्मीदें कम हो गई हैं.

    जोमैटो और अन्य दिग्गजों में गिरावट
    Zomato ने अकेले ही सेंसेक्स की गिरावट में 170 अंक का योगदान दिया, दिसंबर तिमाही के नेट प्रॉफिट में 57% की साल-दर-साल गिरावट दर्ज करने के बाद इसके शेयरों में 11% से अधिक की गिरावट आई. रिलायंस, ICICI बैंक, HDFC बैंक और SBI जैसे अन्य दिग्गजों ने सेंसेक्स की कुल गिरावट में संयुक्त रूप से 311 अंक का योगदान दिया.

    अर्निंग में गिरावट
    दिसंबर तिमाही में भी कई कंपनियों के रिजल्‍ट ज्‍यादा अच्‍छे दिखाई नहीं दे रहे हैं. मेटल, हेल्‍थकेयर जैसे सेक्‍टर में तो अच्‍छी उछाल है. लेकिन मेटल, केमिकल, कंज्‍यूमर, बैंक और अन्‍य में गिरावट की संभावना बढ़ रही है.

    कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी स्टॉक में गिरावट
    निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 3.2% की गिरावट आई, जिसमें डिक्सन टेक्नोलॉजीज और अंबर इंटरप्राइजेज शामिल हैं. तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में 13% से ज़्यादा की गिरावट आई, जेफरीज ने अपनी 'अंडरपरफॉर्म' रेटिंग दी है.

    नहीं रुक रही बिकवाली
    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है. 20 जनवरी, 2025 तक FII ने 48,023 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जिससे उनकी बिकवाली की होड़ कम होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं.

    शेयर बाजार की इस गिरावट के पीछे 5 सबसे बड़े कारण:

    ट्रंप ने BRICS देशों पर दी टैरिफ लगाने की धमकी

    डोनाल्ड ट्रंप का ब्रिक्स (BRICS) देशों पर निशाना साधते हुए दिए गए बयान ने निवेशकों में खलबली मचा दी है। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, चीन, रूस और साउथ अफ्रीका के साथ भारत भी शामिल हैं। ट्रंप ने सोमवार को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालते ही यह साफ किया कि वह उन देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का इरादा रखते हैं जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। व्हाइट हाउस में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी, “अगर कोई BRICS देश… डीडॉलराइजेशन यानी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश जारी रखने के बारे में सोचेगा, तो उसे 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।”

    BRICS का एक प्रमुख सदस्य होने के नाते भारत पर ऐसी स्थित का खासा असर पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह आक्रामक रुख भारत के व्यापारिक समीकरणों पर असर डाल सकता है और बाजार में बड़े स्तर पर चिंता पैदा कर सकता है। इसके अलावा, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आने वाले समानों पर फरवरी से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना का भी ऐलान किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में और अधिक रुकावटें आने की आशंका बढ़ गई है।मेहता इक्विटीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) प्रशांत तापसे ने कहा, 'ट्रंप के टैरिफ से जुड़े फैसले भारतीय बाजारों में गिरावट का मुख्य कारण हैं। भारत पर उनके रुख को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है।'

    कमजोर तिमाही नतीजे

    दिसंबर तिमाही में कंपनियों के मिले-जुले तिमाही नतीजों ने बाजार में चिंता को और बढ़ा दिया है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयर आज 14 प्रतिशत से अधिक गिर गए। दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी के कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा और रेवेन्यू दोनों में तिमाही आधार पर गिरावट द्रज की गई। जोमैटो के शेयर भी आज बाजार खुलते ही 9 प्रतिशत तक क्रैश हो गए। जोमैटो अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट का आक्रामक तरीके से विस्तार कर रही है, जिसका असर इसके दिसंबर तिमाही के मुनाफे पर पड़ा है।रियल एस्टेट सेक्टर में भी ओबेरॉय रियल्टी के शेयर 7.6 प्रतिशत गिर गए, क्योंकि इसके नतीजे बाजार की उम्मीदों से कम रहे। इन निराशाजनक नतीजों के चलते कई प्रमुख सेक्टर्स के ग्रोथ संभावनओं पर सवाल उठे हैं, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।
    जापान में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद

    बैंक ऑफ जापान (BOJ) की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी ग्लोबाल बाजारों में आज बेचैनी दिखी। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो यह पिछले साल जुलाई के बाद से पहली बढ़ोतरी होगी। इसे बढ़ोतरी को अहम कदम माना जा रहा गै, जो ग्लोबल स्तर पर उधार लेने की लागत को प्रभावित कर सकता है। इससे लिक्विडिटी में कमी और भारत जैसे उभरते बाजारों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
    विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली

    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसे निकालना जरूरी रखा है। सोमवार 20 जनवरी को उन्होंने शुद्ध रूप से करीब 4,336.54 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। जनवरी महीने में अबतक विदेशी निवेशकर करीब 50,912.60 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
    आगामी बजट को लेकर अनिश्चितता

    इसके अलावा आगामी बजट 2025 के चलते भी एक अनिश्चतता का माहौल देखा जा रहा और निवेशक बजट के ऐलानों से पहले 'देखो और इंतजार करो' के मूड में दिखाई दे रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वाइस-प्रेसिडेंट चित जैन ने कहा, 'इंडिया VIX इंडेक्स आज 5% से अधिक उछल गया, जो आम बजट से पहले बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दिखाता है। FIIs भी भारतीय बाजार में बिकवाल बने हुए हैं और उन्होंने इस महीने 50,000 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे हैं। यह बाजार में दिख रही गिरावट का मुख्य कारण है।'

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