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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»पारम्परिक वैद्यों के परम्परागत ज्ञान को सहेजने की जरूरत : मंत्री परमार
    मध्यप्रदेश

    पारम्परिक वैद्यों के परम्परागत ज्ञान को सहेजने की जरूरत : मंत्री परमार

    AdminBy AdminJanuary 23, 2025No Comments5 Mins Read
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    पारम्परिक वैद्यों के परम्परागत ज्ञान को सहेजने की जरूरत : मंत्री परमार
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    अपनी चिकित्सा पद्धति (पैथी) आयुर्वेद पर विश्वास करने की है आवश्यकता: मंत्री परमार

    पारम्परिक वैद्यों के परम्परागत ज्ञान को सहेजने की जरूरत
    तीन दिवसीय 21वाँ आयुर्वेद पर्व एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी

    भोपाल

    आयुर्वेद, भारत की अपनी प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है। हमें अपनी चिकित्सा पद्धति (पैथी) पर विश्वास का भाव जागृत करने की आवश्यकता है। आयुर्वेद, भारतीय ज्ञान परम्परा का ही अंग है। आयुर्वेद के प्रति स्वत्व के भाव की जागृति आवश्यक है। प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति 'आयुर्वेद' को विश्वमंच पर सर्वोच्च स्थान पर पहुंचाने के लिए हम कृत संकल्पित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय आयुर्वेद सतत् सुदृढ़ हो रहा है, इसकी उत्तरोत्तर बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता एवं विश्वसनीयता इस बात का प्रमाण है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय "आयुर्वेद पर्व एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी" के समापन अवसर पर कही। मंत्री परमार ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से आयुर्वेद को नई दिशा देने के लिए आयोजकों एवं सहभागियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दीं। परमार ने कहा कि हमारी सभ्यता की मान्यता है कि ज्ञान सार्वभौमिक है लेकिन वैश्विक परिधियों में ज्ञान का दस्तावेजीकरण कर एकाधिकार स्थापित करने का प्रयास किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आने के बाद से हम आयुर्वेद शोध एवं अनुसंधान के दस्तावेजीकरण की ओर आगे बढ़ रहे हैं। मंत्री परमार ने कहा कि जनमानस को ईश्वर के बाद चिकित्सक पर ही विश्वास होता है, इस विश्वनीयता को बनाए रखने के लिए चिकित्सकों में यह संवेदना व्यावहारिक रूप से परिलक्षित भी होनी चाहिए।

    आयुष मंत्री परमार ने कहा कि पारम्परिक वैद्यों के परम्परागत ज्ञान को सहेजने के लिए, शोध के आधार पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों सहित समस्त क्षेत्रों में पीढ़ी दर पीढ़ी परम्परागत रूप से कार्य कर रहे पारम्परिक वैद्यों का, प्रदेशव्यापी पंजीयन करने एवं उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए व्यापक कार्य योजना बना रहे हैं। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश में 11 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय शुरू किए जाएंगे, इनमें से 5 आयुर्वेद महाविद्यालय आने वाले सत्र से ही शुरू हो जाएंगे। विभागीय अधिकारियों के उच्च पद प्रभार प्रक्रिया, उनके अद्यतन समयमान एवं वेतनमान की प्रक्रिया को समयावधि पर पूरा किया जा रहा है। मंत्री परमार ने कहा कि शीघ्र ही नव-चयनित प्रशिक्षु 533 आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।

    आयुष मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश के समस्त आयुष महाविद्यालयों में फार्मेसी बनाई जाएगी, इसके लिए विस्तृत कार्य योजना बनाकर क्रियान्वयन किए जाएगा। महाविद्यालयों में जहाँ फार्मेसी उपलब्ध है, उन्हें सुदृढ़ करने के लिए मानव संसाधन, भवन उन्नयन, उपकरण एवं मशीनरी आदि की उपलब्धता नियत समयावधि पर सुनिश्चित की जायेगी। आयुष औषधियों के लिए वित्तीय वार्षिक बजट को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री परमार ने कहा कि यूनानी चिकित्सा शिक्षा को हिन्दी भाषा में अध्ययन की सुविधा प्रदान करने के लिए, यूनानी पाठ्यक्रमों का हिन्दी भाषा में शीघ्र अनुवाद सुनिश्चित कर, यूनानी पाठ्यक्रम की हिंदी में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कार्य किया जा रहा है।

    स्थानीय विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से निकले अमृत से पूरे विश्व को लाभ मिलेगा। विधायक सबनानी ने कहा कि पुरातन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। विधायक सबनानी ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफलतम आयोजन के लिए बधाई दी।

    केंद्रीय आयुष मंत्रालय के सहयोग से 21वाँ आयुर्वेद पर्व 2025 का आयोजन भोपाल में पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान एवं अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के संयुक्त तत्वाधान में 20, 21 एवं 22 जनवरी को किया गया। तीन दिवसीय आयुर्वेद पर्व में विज्ञान प्रदर्शनी, आयुर्वेद उत्पाद एवं आयुर्वेदिक औषधियों की प्रदर्शनी, निशुल्क चिकित्सा शिविर तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें 200 से अधिक शोध पत्रों का वाचन किया गया एवं 52 पोस्टर का प्रस्तुतीकरण किया गया। साथ ही पांच प्लेनरी विशेषज्ञ व्याख्यान दिए गए एवं सॉविनीयर का प्रकाशन किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आए आयुर्वेद विशेषज्ञों ने आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का सफल एकीकरण, पुराने रोगों में आयुर्वेद सिद्धांत आधारित चिकित्सा, वैश्विक चिकित्सा में आयुर्वेद का योगदान, ट्रेंड व भविष्य की रूपरेखा, प्रकृति आधारित आयुर्वेद चिकित्सा, आयुर्वेद औषधि गुणवत्ता में नैनो पार्टिकल का महत्व, आयुर्वेद औषधियों के एडवांस्ड एक्सट्रैक्शन एवं आयुर्वेद औषधि निर्मित करने की नवीन विधियां, आयुर्वेद पादप औषधि में पाई जाने वाली बायोएक्टिव कंपाउंड का चिकित्सा में उपयोग, आयुर्वेद में डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी का महत्व, आयुर्वेद आधारित अनुसंधान में प्रोन्नति और आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञान के एकीकरण की विधि सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

    तीन दिवसीय सेमिनार के 15 वैज्ञानिक सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से सम्मानित प्रोफेसर विषय विशेषज्ञ एवं फार्मास्यूटिकल कंपनियों के एमडी एवं सीईओ ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त विभिन्न फार्मास्यूटिकल कंपनियों जैसे धूतपापेश्वर, डाबर, बैद्यनाथ, नागार्जुन, आयुर्वेद शाला कोट्टक्कल एवं मुल्तानी द्वारा लगाए गए एवं विभिन्न आयुर्वेद पंचकर्म यंत्र उपकरण के लगभग 70 स्टॉल भी लगाए गए। समापन समारोह में वैज्ञानिक प्रदर्शनी में भाग लेने वाली सभी फार्मास्यूटिकल कंपनियों एवं कार्यक्रम आयोजकों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

    इस अवसर पर केंद्रीय आयुष मंत्रालय अंतर्गत सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. अशोक वार्ष्णेय, अपर सचिव आयुष संजय मिश्र, वैद्य एस.एन. पांडे, वैद्य विनोद बैरागी, डॉ. नितिन मारवाह, डॉ. आर.के. पति, डॉ. चारु बंसल एवं संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. उमेश शुक्ला सहित अन्य विद्वतजन, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

     

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