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    Home»व्यापार»केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता : अन्नामलाई
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    केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता : अन्नामलाई

    AdminBy AdminApril 17, 2025No Comments7 Mins Read
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     चेन्नई

    तमिलनाडु की डीएमके सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन भाषा नीति, जनसंख्या के आधार पर परिसीमन आदि का विरोध कर रही है. तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए. उनका आरोप रहा है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिणी राज्यों में लोकसभा की सीटें घट जाएंगी और संसद में उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटेगा. अब तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने स्वायत्तता का राग अलापना भी शुरू किया है. दरअसल स्टालिन ही नहीं दक्षिण के राज्यों को यूपी से बहुत दिक्कत रही है. पिछले महीने तो स्टालिन ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक को निशाने पर ले लिया. दरअसल तमिलनाडु में हिंदी विरोध के पीछे एक अहसास यह है कि यह पिछड़े और गरीब लोगों की भाषा है. अगर ऐसा नहीं होता तो विदेशी भाषा होते हुए भी अंग्रेजी को क्यों सम्मान मिलता?

    पर उल्लेखनीय यह भी है कि तमिलनाडु के बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई को हिंदी और हिंदी भाषी प्रदेशों से कोई दिक्कत नहीं है. वो अपने राज्य में ही तर्क देकर यह बताते हैं कि जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बन गई है तब से दक्षिण के राज्यों को केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आनुपातिक बढ़ोतरी हुई है. इतना ही नहीं वो दक्षिण के राज्यों विशेषकर तमिलनाडु को आगाह करते हैं कि यूपी को जगाओ मत ,अगर यह राज्य जग गया तो दक्षिण की छुट्टी हो जाएगी.

     योगी को क्यों निशाने पर लिया स्टालिन ने

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि 'तमिलनाडु की भाषा नीति और निष्पक्ष परिसीमन की मांग आज पूरे देश में गूंज रही है. भाजपा इससे परेशान है, जो उनके नेताओं के इंटरव्यू से पता चलता है. अब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमें नफरत पर भाषण देना चाहते हैं? हमें बख्श दीजिए. ये तो राजनीतिक कॉमेडी हो गई.' इसके बाद स्टालिन ने योगी आदित्यनाथ के आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि 'हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि हम थोपने और अंधराष्ट्रीयता का विरोध कर रहे हैं. यह वोट बैंक की राजनीति नहीं है बल्कि ये न्याय और स्वाभिमान की लड़ाई है.

    दरअसल योगी ने तमिलनाडु में भाषा नीति और परिसीमन के विरोध को लेकर बयान दिया था. योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद को छोटी राजनीतिक सोच करार दिया. उन्होंने कहा कि स्टालिन धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका वोटबैंक खिसक रहा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाषा को लोगों को एकजुट करना चाहिए न कि बांटना चाहिए. उन्होंने लोगों को भी बांटने वाली राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी थी.

    अन्नामलाई के तर्क

    अन्नामलाई पिछले साल एक उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत को लेकर हुए एक डिबेट में तर्कों की झड़ी लगा दी थी. वो बताते हैं कि केंद्र से मिलने वाली राज्यों की मदद के बंटवारे का जो फार्मूला इंदिरा गांधी के समय लाया गया उसमें जनसंख्या का आधार 50 प्रतिशत रखा गया. अन्नामलाई समझाते हैं कि अगर 100 रुपये केंद्र को राज्यों को बांटने थे उसमें स 50 रुपये का आधार जनसंख्या होने के चलते उत्तर के राज्यों को फायदा मिलता था. बाद में जनसंख्या का बेस और बढ़ा. पर आज बीजेपी के राज में यह कम होकर केवल 15 परसेंट हो गया है.

    यानि केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के बंटवारे का फायदा अब अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को नहीं मिलता है. इसके साथ ही 45 परसेंट आधार अमीर और गरीब राज्यों के लिए बराबर हो गया है. इसी तरह 15 प्रतिशत वेटेज वित्तीय सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिया रखा गया है.15 प्रतिशत का वेटेज विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए रखा गया है. इसके साथ ही 10 प्रतिशत का वेटेज इकोलॉजी को दिया गया है. 15 प्रतिशत भौगोलिक एरिया को वेटेज मिल रहा है.

     अन्नामलाई के कहने का मतलब साफ है कि उपरोक्त आधारों का अगर विश्वेषण करें तो साफ पता चलता है कि दक्षिण के राज्यों के हितों का ध्यान उत्तर से ज्यादा रखा गया है. जनसंख्या के आधार को कहां 60 प्रतिशत से नीचे लाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया. गुड गवर्ननेंस के नाम पर कोई फायदा नहीं होता था पर आज इसके नाम पर 15 प्रतिशत का लाभ होता है.

    अन्ना मलाई इस बात के लिए स्टालिन और अन्य नेताओं की आलोचना करते हैं कि वे देश और राज्य को चलाने के लिए जिस फार्मूले की बात कर रहे हैं वो न्यायपूर्ण नहीं है. वो उदाहरण देते हैं कि तमिलनाडु में 34 परसेंट रेवेन्यू 4 जिलों से आता है. क्या राज्य के कुल रेवेन्यू का 34 प्रतिशत इन चार जिलों को ही मिलना चाहिए? अन्नामलाई कहते हैं कि इस तरह से देश नहीं चल सकता है.

    यूपी के मजदूरों के भरोसे तमिलनाडु की इंडस्ट्री

    अन्ना मलाई बताते हैं कि तमिलनाडु में यूपी के 25 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. अगर अनऑफिशियल को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 40 लाख लेबर यूपी के तमिलनाडु में हैं. अन्ना कहते हैं कि कल्पना करिए अगर योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार कहें कि इतने सस्ता श्रम क्यों आपको उपलब्ध कराएं तो तमिलनाडु क्या कर लेगा? आज पूरी दुनिया की इकॉनमी सस्ते श्रम के भरोसे ही है.

    वास्तव में अगर यूपी और बिहार की ओर से यह मांग रख दी जाए कि उनके राज्य के लोगों को एक निश्चित रकम जरूर मिलना चाहिए अन्यथा उनके जाने पर रोक लगा दी जाएगी . कल को योगी और नीतीश कुमार अगर यह मांग करें कि हर मजदूर के नाम 10 हजार रुपये उनके राज्य को चाहिए तो हम क्या इनकार कर पाएंगे?  पर देश ऐसे नहीं चलता है. अन्ना मलाई कहते हैं कि याद करिए जब कोविड के समय मजदूरों को वापस बुलाने के लिए तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार हिंदी में प्रेस रिलीज जारी किया गया था.

    4- वास्तव में यूपी की तरक्की हैरान करने वाली है

    अन्नामलाई कहते हैं कि जिस तरह कहा जाता है कि चीन सो रहा है उसे मत छेड़ो, उसी तरह यूपी सो रहा उसे जगाओगे तो मुश्किल में पड़ जाओगे.अन्नमलाई 2022 और 2023 के आंकड़ों के आधार पर बताते हैं कि देश में सबसे अधिक निवेश यूपी में आ रहा है. तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य यूपी से बहुत पीछे हैं निवेश को आकर्षित करने में . अन्नामलाई बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसी पिछड़ी जगहों पर 9 लाख करोड़ रुपये का विदेश निवेश आया है. दक्षिण के राज्यों को उत्तर प्रदेश से सीख लेने की जरूरत है.

    पिछले साल उत्तर प्रदेश के आधिकारिक आंकड़ों में  उत्तर प्रदेश की तरक्की दिख रही थी. जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर पहुंच गया था. जो 2025 में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है. जीडीपी हिस्सेदारी के संदर्भ में, उत्तर प्रदेश ने तमिलनाडु (9.1 प्रतिशत), गुजरात (8.2 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (7.5 प्रतिशत) जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है. कर्नाटक (6.2 प्रतिशत), राजस्थान (5.5 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (4.9 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश (4.6 प्रतिशत) जैसे राज्य उत्तर प्रदेश से काफी पीछे हैं.

    यूपी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में भी 14वें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. इसके अतिरिक्त, कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के कारण जीआईएस 2023 के माध्यम से राज्य को 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए. राज्य से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का सामान निर्यात हो रहा है. बैंकों का ऋण-जमा अनुपात 42-43 प्रतिशत से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया है, जबकि इसे 60 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है.

    योगी आदित्यनाथ ने अभी कुछ दिन पहले ही कहा है कि उत्तर प्रदेश 2030 तक राष्ट्रीय औसत के बराबर प्रति व्यक्ति आय के साथ देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

     

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