Close Menu
New Agenda
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    NEW AGENDA
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • लाइफ स्टाइल
    NEW AGENDA
    Home»देश»ISRO चार साल के बजाय एक साल में 52 जासूसी सैटलाइट आसमान में भेजेगा
    देश

    ISRO चार साल के बजाय एक साल में 52 जासूसी सैटलाइट आसमान में भेजेगा

    AdminBy AdminJuly 1, 2025No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    ISRO चार साल के बजाय एक साल में 52 जासूसी सैटलाइट आसमान में भेजेगा
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुश्मन के इलाके पर लगातार नजर रखने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसलिए, भारत अपनी सेना के लिए 52 नए सैटेलाइट (डिफेंस सर्विलांस सैटेलाइट) जल्दी ही लॉन्च करने की योजना बना रहा है। साथ ही एक मजबूत मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन ( अंतरिक्ष में युद्ध के नियम) भी तैयार कर रहा है। पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने स्पेस-बेस्ड सर्विलांस (SBS) प्रोग्राम के तीसरे चरण को मंजूरी दी थी। इस पर 26,968 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके तहत, इसरो (ISRO) 21 सैटेलाइट बनाएगा और तीन प्राइवेट कंपनियां 31 सैटेलाइट बनाएंगी।

    2026 अप्रैल तक पहला डिफेंस सर्विलांस सैटेलाइट लॉन्च होगा
    इनमें से पहला डिफेंस सर्विलांस सैटेलाइट 2026 के अप्रैल तक लॉन्च हो जाएगा। 2029 के अंत तक सभी 52 सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना है। यह प्रोजेक्ट डिफेंस स्पेस एजेंसी (DSA) की अगुवाई में चल रहा है। डीएसए रक्षा मंत्रालय के इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) का हिस्सा है। एक सूत्र ने TOI को बताया, 'सैटेलाइट को जल्दी ही लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) और जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में लॉन्च करने के लिए काम चल रहा है। जिन तीन प्राइवेट कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट मिला है, उन्हें सैटेलाइट बनाने की गति बढ़ाने के लिए कहा गया है।' लो अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी के करीब की कक्षा है, जबकि जियोस्टेशनरी ऑर्बिट पृथ्वी से बहुत दूर की कक्षा है।

    2026 के अंत तक तैयार हो जाएंगे सैटेलाइट्स

    भारत सरकार ने तीन प्राइवेट कंपनियों—अनंत टेक्नोलॉजीज, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स और अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज को सैटेलाइट बनाने के समय को चार साल से घटाकर 12-18 महीनों में पूरा करने को कहा है। अब ये सैटेलाइट्स 2026 के अंत तक तैयार हो सकते हैं, जबकि पहले इनका प्लान 2028 का था।

    अनंत टेक्नोलॉजीज जिस सैटेलाइट को बना रही है, उस सैटेलाइट के इसी साल तैयार हो जाने की संभावना है। इसे ISRO के भारी रॉकेट LVM-3 या फिर एलन मस्क की कंपनी SpaceX के जरिए लॉन्च किया जा सकता है।

    3 बिलियन डॉलर की योजना

    ये सारी प्रक्रिया 3 बिलियन डॉलर की Space-based Surveillance-3 (SBS-3) योजना के तहत हो रही है, जिसे अक्टूबर में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने मंजूरी दी थी। इसके तहत कुल 52 निगरानी सैटेलाइट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 31 प्राइवेट कंपनियां बना रही हैं और बाकी ISRO धीरे-धीरे बनाएगा।
    कौन कंपनियां बना रहीं हैं ये सैटेलाइट

    तीनों कंपनियां—हैदराबाद की अनंत टेक्नोलॉजीज, बेंगलुरु की सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स और अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज ISRO की पुरानी पार्टनर और सप्लायर रही हैं। इन्होंने पहले भी निगरानी सैटेलाइट्स और चंद्रयान-3 जैसे मिशनों में अहम भूमिका निभाई है।

    अनंत टेक्नोलॉजीज़, जिसे ISRO के पूर्व साइंटिस्ट सुब्बा राव पावुलुरी लीड कर रहे हैं और सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स, जिसके चेयरमैन अप्पाराव मल्लवारपू हैं। इन दोनों कंपलियों ने चंद्रयान-3 में अहम कॉम्पोनेंट्स सप्लाई किए थे।

    तीसरी कंपनी, अल्फा डिजाइन को अप्रैल 2019 में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने पूरी तरह खरीद ली थी। ये कंपनी ISRO के लिए NavIC सैटेलाइट्स बनाने में भी शामिल रही है, जो कि भारत का खुद का GPS सिस्टम है।
    प्राइवेट कंपनियां का संवेदनशील प्रोजेक्ट्स में बड़ी भूमिका

    सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स प्राइवेट स्पेस कंपनियों के लिए बहुत अहम होते हैं। स्पेस इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि प्राइवेट कंपनियां बड़े और संवेदनशील प्रोजेक्ट्स में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के स्पेस फेलो चैतन्य गिरी ने बताया कि ये कंपनियां पहले से ही ISRO की सप्लायर हैं, इसलिए इनके लिए सैटेलाइट्स बनाना और लॉन्च करना कोई नई बात नहीं है।

    भारत के रक्षा मंत्रालय की ओर से इन सैटेलाइट्स निर्माण की प्रक्रिया तेज करने का ‘सॉफ्ट ऑर्डर’ उस वक्त आया, जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत की थी।

    चीन-पाकिस्तान से हिंद महासागर क्षेत्र तक पर रहेगी नजर
    सूत्र ने आगे बताया,'स्पेस-बेस्ड सर्विलांस (SBS)-3 का लक्ष्य चीन और पाकिस्तान के बड़े इलाकों के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र को भी कवर करना है। इसके लिए, सैटेलाइट कम समय में एक ही जगह की तस्वीरें ले सकेंगे और उनकी क्वालिटी भी बेहतर होगी। स्पेस डॉक्ट्रिन को भी बेहतर बनाया जा रहा है।'इसका मतलब है कि सैटेलाइट पहले से अधिक तेजी से और बेहतर तरीके से जानकारी जुटा पाएंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की ओर से पाकिस्तान की सक्रिय सपोर्ट की रिपोर्ट आ चुकी हैं। ऐसे में अंतरिक्ष में चीन की बढ़ती ताकत को अब भारत के लिए नजरअंदाज करना नाममुकिन हो चुका है।

    हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम खरीदने की भी तैयारी
    इसके साथ ही भारतीय वायुसेना (IAF) तीन हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) एयरक्राफ्ट खरीदने की तैयारी कर रही है। HAPS एक तरह के ड्रोन होते हैं, जो बहुत ऊंचाई पर उड़ते हैं और लंबे समय तक खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और टोह लेने (ISR) का काम करते हैं। इन्हें 'स्यूडो-सैटेलाइट'(छद्म सैटेलाइट) भी कहा जाता है। एनबीटी ऑनलाइन पहले भी यह खबर दे चुका है।

    देखते ही फौरन कार्रवाई करने लायक लूप बनाने पर जोर
    ऑपरेशन सिंदूर (पाकिस्तान के खिलाफ 7 से 10 मई के बीच) के दौरान भारत ने कार्टोसैट जैसे घरेलू सैटेलाइट और विदेशी कमर्शियल सैटेलाइट का इस्तेमाल करके पाकिस्तानी सेना की हरकतों पर नजर रखी थी। एक और सूत्र ने कहा, 'हमें अपने ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड एंड एक्ट (OODA) लूप को छोटा करना होगा। भारत जितनी जल्दी 52 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा, उतना ही बेहतर होगा।' OODA लूप का मतलब है कि किसी भी स्थिति को देखकर, समझकर, फैसला लेकर तुरंत कार्रवाई करना।

    अंतरिक्ष में भी चीन की चुनौती से निपटने की तैयारी जरूरी
    भारत को अपनी सैटेलाइट की सुरक्षा के लिए भी एक शील्ड भी बनानी होगी। क्योंकि, चीन डायरेक्ट एसेंट एंटी-सैटेलाइट मिसाइल, को-ऑर्बिटल सैटेलाइट, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण और हाई-पावर्ड लेजर जैसे हथियार बना रहा है। इनका इस्तेमाल करके वह दूसरे देशों को अंतरिक्ष के इस्तेमाल को सीमित कर सकता है। चीन का मिलिट्री स्पेस प्रोग्राम 2010 में सिर्फ 36 सैटेलाइट से बढ़कर 2024 तक 1,000 से ज्यादा सैटेलाइट तक पहुंच गया था। इनमें से 360 सैटेलाइट ISR (खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और टोह लेने) मिशन के लिए हैं।

    रियल-टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस की आवश्यकता अहम
    इस महीने की शुरुआत में एक सेमिनार में आईडीएस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारत के 'निगरानी दायरे' को बढ़ाने की आवश्कता पर जो दिया था। उन्होंने संघर्षों में 'रियल-टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस' की अहमियत पर जोर दिया था। रियल-टाइम सिचुएशनल अवेयरनेस का मतलब है कि किसी भी स्थिति की जानकारी तुरंत मिलना। उन्होंने कहा, 'हमें संभावित खतरों को तब पहचानना और ट्रैक करना ही काफी नहीं होगा, जब वे हमारी सीमाओं के पास आएं, बल्कि तब जब वे अपने स्टेजिंग एरिया, एयरफील्ड और बेस में ही हों।'

    अंतरिक्ष में भी सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है चीन
    पिछले साल अप्रैल में चीन ने पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) की एयरोस्पेस फोर्स बनाई थी। इससे पता चलता है कि चीन अंतरिक्ष को भी आधुनिक युद्ध का ठिकाना बनाना चाहता है। एयर मार्शल दीक्षित ने कहा, 'उनके सैटेलाइट ने हाल ही में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 'डॉगफाइटिंग' युद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया है। वे ऐसी रणनीति का अभ्यास कर रहे हैं, जिससे दुश्मन की 'स्पेस प्रॉपर्टी' को ट्रैक किया जा सके और उसे निष्क्रिय किया जा सके। वे 'किल चेन' से 'किल मेश' में बदल गए हैं – एक ऐसा इंटीग्रेटेड नेटवर्क जो ISR सैटेलाइट को हथियार प्रणालियों के साथ जोड़ता है।' 'डॉगफाइटिंग' का मतलब है, जब सैटेलाइट एक-दूसरे का पीछा करते हैं, जैसे फाइटर जेट युद्ध में करते हैं। 'किल चेन' का मतलब है कि दुश्मन को मारने के लिए एक के बाद एक कार्रवाई करना। 'किल मेश' का मतलब है कि दुश्मन को मारने के लिए एक साथ कई कार्रवाई करना।

    "क्या आपको लगता है कि भारत द्वारा 52 नए सैन्य निगरानी उपग्रहों के प्रक्षेपण और एक मजबूत अंतरिक्ष सिद्धांत के निर्माण से क्षेत्रीय सुरक्षा में पर्याप्त सुधार होगा, या और क्या कदम उठाने की आवश्यकता है? अपनी राय हिंदी या अंग्रेजी में कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें! लॉग इन करें और अपनी बात रखें!
    "

    शेयर करें :-

    • Click to share on Facebook (Opens in new window)
    • Click to share on WhatsApp (Opens in new window)
    • Click to share on X (Opens in new window)
    • Click to share on Telegram (Opens in new window)
    Featured ISRO
    Admin

    Related Posts

    हालात को देखते हुए दुबई में भारतीय दूतावास अलर्ट, भारतीयों से कहा- बेवजह बाहर न निकलें

    March 3, 2026

    चुनाव से पहले बड़ा दांव? भारतीय जनता पार्टी सक्रिय, योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में बदलाव की चर्चा

    March 3, 2026

    हर क्षेत्र में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के किए जा रहे हैं समेकित प्रयास

    March 3, 2026

    मालवा-निमाड़ बना सियासी केंद्र, आदिवासियों के बीच आधार मजबूत करने में जुटी भाजपा

    March 3, 2026

    मोहन सरकार की आदिवासी वोटरों पर नजर, बड़वानी बैठक से निकाय चुनाव की रणनीति का इशारा

    March 3, 2026

    रोजगार आधारित कृषि उद्योगों के विकास पर है विशेष जोर

    March 3, 2026
    Add A Comment

    Leave A Reply Cancel Reply

    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    MP Info RSS Feed
    अन्य ख़बरें

    04 मार्च 2026 का राशिफल: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्य, किसे मिलेगा बड़ा लाभ

    March 3, 2026

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच राहत, भारी तेजी के बाद थमा कच्चे तेल का रुख

    March 3, 2026

    हालात को देखते हुए दुबई में भारतीय दूतावास अलर्ट, भारतीयों से कहा- बेवजह बाहर न निकलें

    March 3, 2026

    ईरान संकट पर पाकिस्तान सतर्क, रक्षा मंत्री का बयान—युद्ध भड़का तो पड़ेंगे गंभीर असर

    March 3, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक -दीपेन्द्र पाढ़ी
    मोबाइल -9329352235
    ईमेल -newagendaeditor@gmail.com
    मध्य प्रदेश कार्यालय -वार्ड क्रमांक 06, मोहगांव बिरसा, मोहगांव जिला-बालाघाट (म.प्र.)
    छत्तीसगढ़ कार्यालय-D 13, प्रियदर्शनी नगर के पास, पचपेड़ी नाका, रायपुर (छत्तीसगढ़)
    March 2026
    M T W T F S S
     1
    2345678
    9101112131415
    16171819202122
    23242526272829
    3031  
    « Feb    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.