टीकमगढ़
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर रविवार को उस वक्त साफ नजर आया जब केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक पृथ्वीपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास का औचक निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान छात्रावास की जो तस्वीर सामने आई, वह न केवल चिंताजनक थी बल्कि व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली थी।
रोटियों का कच्चापन देख मंत्री का पारा चढ़ा
दोपहर के भोजन के समय जब डॉ. खटीक सीधे छात्रावास की रसोई में दाखिल हुए, तो वहां बन रही रोटियों की गुणवत्ता ने व्यवस्था की पोल खोल दी। डोंगे में रखी रोटियां न केवल ठंडी थीं, बल्कि वे ठीक से सिकी भी नहीं थीं। रोटियों का कच्चापन देख मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद महिला कुक को रोटियां दिखाते हुए कड़े लहजे में नसीहत दी। डॉ. खटीक ने दो टूक शब्दों में कहा ये बेटियां देश का भविष्य हैं, इनके स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भोजन केवल काम समझकर मत बनाओ, इन्हें अपनी बेटियां समझकर खिलाओ। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधपका भोजन बच्चों के पाचन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
अव्यवस्थाओं का अंबार: न शुद्ध पानी, न सही बिस्तर
भोजन के बाद जब मंत्री ने छात्रावास परिसर का गहराई से जायजा लिया, तो अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी भारी कमियां पाई गईं। अधिकांश छात्रावासों की तरह यहां भी पीने के पानी की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। छात्राओं से संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि उन्हें स्वच्छ पेयजल के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। छात्राओं के कमरों में रखे पलंग और गद्दों की स्थिति दयनीय मिली, जो लंबे समय से बदले नहीं गए थे। वहीं छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था और चारदीवारी के रखरखाव में लापरवाही नजर आई। कई कमरों में रोशनी की उचित व्यवस्था नहीं थी, जिससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
अधिकारियों को चेतावनी
संवाद के दौरान छात्राओं ने अपनी दिनचर्या और समस्याओं को लेकर खुलकर बात की। छात्राओं की बातें सुनने के बाद डॉ. खटीक ने वार्डन और मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि छात्रावास की बुनियादी सुविधाओं में बिजली, पानी और सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार बजट की कमी नहीं होने देती, फिर भी बच्चों को बुनियादी सुविधाएं न मिलना प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने एक निश्चित समय सीमा के भीतर सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और उसकी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
