नई दिल्ली
संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) द्वारा लगाए गए निराधार आरोपों का करारा जवाब दिया है। 'राइट टू रिप्लाई' का इस्तेमाल करते हुए भारत ने स्पष्ट शब्दों में पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ा दीं।
OIC और पाकिस्तान के 'जलन' भरे प्रोपेगेंडा पर प्रहार
अनुपमा सिंह ने कहा कि भारत पाकिस्तान और OIC के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता है। उन्होंने OIC को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह संगठन केवल पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को तोते की तरह दोहरा रहा है। यह इस बात का सबूत है कि OIC ने खुद को एक देश (पाकिस्तान) की राजनीतिक मजबूरियों का 'इको चैंबर' बनने दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का यह लगातार किया जाने वाला दुष्प्रचार अब केवल उसकी 'ईर्ष्या' को दर्शाता है, जिसे भारत तवज्जो देना भी सही नहीं समझता, लेकिन तथ्यों को स्पष्ट करना जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग और PoK खाली करने की मांग
भारतीय राजनयिक ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कश्मीर का भारत में विलय पूरी तरह से कानूनी और अपरिवर्तनीय था। पाकिस्तान की कोई भी बयानबाजी इस तथ्य को नहीं बदल सकती। भारत ने सख्त लहजे में कहा कि इस क्षेत्र में एकमात्र विवादित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र (PoK) पर किया गया अवैध कब्जा है और पाकिस्तान को इन क्षेत्रों को तुरंत खाली कर देना चाहिए।
लोकतंत्र पर पाकिस्तान को आईना
अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के लोकतंत्र पर लेक्चर देने को हास्यास्पद बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक ऐसा देश जहां नागरिक सरकारें मुश्किल से ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाती हैं, उसका लोकतंत्र पर बोलना खोखला लगता है। इसके विपरीत, उन्होंने जम्मू-कश्मीर के आम चुनावों और विधानसभा चुनावों में हुई रिकॉर्ड वोटिंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को नकार दिया है और विकास व लोकतंत्र का रास्ता चुना है।
'ला-ला लैंड' का तंज और IMF बेलआउट पैकेज से तुलना
भारत ने विकास के मोर्चे पर भी पाकिस्तान को आईना दिखाया। जम्मू-कश्मीर में बने दुनिया के सबसे ऊंचे 'चिनाब रेल ब्रिज' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान इसे नकली समझता है, तो वह 'ला-ला लैंड' (भ्रम की दुनिया) में जी रहा है। पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की खस्ताहाली पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह जानकर हैरानी होगी कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान द्वारा हाल ही में IMF से मांगे गए बेलआउट पैकेज (राहत पैकेज) के दोगुने से भी अधिक है।
अपने आंतरिक संकटों पर ध्यान दे पाकिस्तान
अपने बयान का समापन करते हुए भारत ने कहा कि पाकिस्तान की 'स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म' के जरिए क्षेत्र को अस्थिर करने की तमाम कोशिशों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नाटक करने के बजाय अपने देश के भीतर गहराते आंतरिक संकटों को सुलझाने पर ध्यान दे। पूरी दुनिया पाकिस्तान के इस 'ढोंग' की असलियत अच्छी तरह देख सकती है।
